बस्ती में सरदार सेना ने यूजीसी एक्ट 2026 और जातीय जनगणना की मांग को लेकर मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन किया। शास्त्री चौक से कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालने के बाद राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों और कॉलेज परिसरों में दलित, पिछड़ा, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग छात्रों के साथ लंबे समय से जातीय भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस कारण कई छात्र अवसाद में आकर आत्महत्या करने को मजबूर हुए हैं, जिसमें रोहित वेमुला और पायल तड़वी के मामले प्रमुख हैं। इसे संस्थागत हत्या बताया गया। ज्ञापन में बताया गया कि यूजीसी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019-20 में जातीय भेदभाव से जुड़ी 173 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जो चार वर्षों में बढ़कर 378 हो गईं। सेना ने कहा कि ये केवल दर्ज मामले हैं, जबकि वास्तविक स्थिति कहीं अधिक गंभीर है और आजादी के 79 वर्षों बाद भी ऐसी घटनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं। सरदार सेना के पदाधिकारियों ने 13 जनवरी 2026 को जारी यूजीसी एक्ट 2026 पर 29 जनवरी 2026 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाए जाने पर एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग में गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान जातीय जनगणना की घोषणा के बावजूद जारी राजपत्र में ओबीसी और सामान्य वर्ग का कॉलम न होने को ‘छल’ करार दिया। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि यूजीसी एक्ट 2026 को संसद में विधिवत बिल के रूप में प्रस्तुत कर कानून बनाया जाए। साथ ही, जनगणना में जातीय जनगणना का कॉलम जोड़ते हुए ओबीसी और सामान्य वर्ग के आंकड़े शामिल किए जाएं। सेना ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन को राष्ट्रव्यापी स्तर पर विस्तारित किया जाएगा। इस प्रदर्शन में विनय चौधरी, चौधरी बृजेश पटेल (पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष), जिला पंचायत सदस्य शंकर चौधरी, लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र नेता अशोक प्रभात, अभय पटेल, अभिषेक चौधरी, अखिलेश प्रजापति और ग्राम प्रधान रवि प्रकाश चौधरी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
https://ift.tt/VXnq6UI
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply