कानपुर नगर निगम में मेयर और भाजपा पार्षदों के बीच चल रहा विवाद अब सरकार तक पहुंच चुका है। भाजपा के पार्षद ही खुलकर अपने भाजपा की मेयर की खिलाफत कर रहे हैं और लगातार भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। पार्षदों ने मेयर के बेटे पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के जनप्रतिनिधियों के बीच हो रहे इस विवाद के बाद उत्तर इकाई के जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने दोनों पक्षों से बातचीत की थी। अब इस मामले में प्रभारी मंत्री योगेंद्र उपाध्याय मेयर और पार्षदों से बात करेंगे। वह रविवार को एक कार्यक्रम में कानपुर आ रहे हैं और यहां दोनों पक्षों से बातचीत करेंगे। गोष्ठी में शामिल होने आ रहे हैं प्रभारी मंत्री कानपुर के प्रभारी मंत्री 4 जनवरी को अटल बिहारी बाजपेयी के जन्म शताब्दी वर्ष को लेकर होने वाली गोष्ठी में शामिल होने के लिए कानपुर आ रहे हैं। नगर निगम के सभागार में ही यह गोष्ठी होगी, जिसके बाद मेयर और पार्षदों के बीच चल रहे विवाद पर भी चर्चा की जाएगी। सूत्रों की माने तो निगम में चल रहे इस विवाद पर सरकार ने सीधा हस्तक्षेप किया है और इस विवाद को खत्म करने के लिए ही प्रभारी मंत्री को कानपुर भेजा जा रहा है। जिससे वह मेयर और पार्षदों के बीच चल रहे इस विवाद को खत्म कराएं। क्योंकि इस विवाद के कारण पार्टी की छवि भी कानपुर में धूमिल हो रही है। पार्षदों पर कार्रवाई के बाद तेज हुआ विवाद नगर निगम में 26 दिसंबर को सदन हुआ था, जिसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा करने के बाद प्रस्ताव पास किए गए थे। इसमें वार्ड 4 के पार्षद अंकित सैनी और वार्ड 37 के पार्षद पवन गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। वह सदन में अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया। जिस पर वह लगातार सदन में अपनी बात रखना चाह रहे थे। लेकिन सदन की कार्रवाई को तुरंत खत्म कर दिया गया था और शाम को दोनों पार्षदों को आगामी 4 सदन के लिए सस्पेंड कर दिया गया था। जिसके बाद से विवाद शुरू हो गया। पार्षदों का आरोप है कि मेयर के बेटे बंटी के कहने पर यह कार्रवाई हुई है। क्योंकि वह नगर निगम में भ्रष्टाचार करता है। निगम की हर गतिविधि में उसका पूरा हस्तक्षेप है।
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