सोनभद्र में 26 जनवरी को सीओ की सरकारी गाड़ी से एक महिला की मौत के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। पीड़ित परिवार को न्याय न मिलने का आरोप लगाते हुए सरदार सेना और ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया है। हजारों की संख्या में सरदार सेना के कार्यकर्ता और ग्रामीण जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन किया। इस दौरान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा। सरदार सेना ने प्रशासन से पीड़ित परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये का मुआवजा, एक सरकारी नौकरी और 5 बीघा जमीन की मांग की है। साथ ही, दुर्घटना में शामिल वाहन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की गई है। डॉ. अरविंद पटेल ने बताया कि कमलेश पटेल रेणुकूट के मुर्धवा मोड़ पर चाय-पान की दुकान चलाकर जीवन यापन करते थे। उनकी पत्नी अस्पताली देवी और एक दिव्यांग बेटा भी उनके साथ रहते थे। 26 जनवरी को पिपरी के सीओ की गाड़ी से हुई दुर्घटना में अस्पताली देवी की मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि दाह संस्कार के बाद जब वे एफआईआर दर्ज कराने गए, तो पुलिस ने अज्ञात वाहन से दुर्घटना दिखाकर मामले को रफा-दफा करने का दबाव बनाया। इससे परिवार को किसी भी सरकारी लाभ या योजना से वंचित किया जा रहा है। पीड़ित परिवार और सरदार सेना ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर संवैधानिक न्याय दिलाने की गुहार लगाई थी। ज्ञापन में 1 करोड़ रुपये का मुआवजा, दुर्घटना में लिप्त प्रशासनिक अधिकारी पर जांच कर तत्काल कार्रवाई और वाहन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। सरदार सेना ने 48 घंटे में मांगें पूरी न होने पर गांधीवादी तरीके से आंदोलन की चेतावनी दी थी। मांगों पर कोई विचार न होने के बाद, आज हजारों की संख्या में समाज के लोग और पीड़ित परिवार के सदस्य जिलाधिकारी परिसर में एकत्रित हुए हैं। वे न्याय मिलने तक प्रदर्शन जारी रखने की बात कह रहे हैं।
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