मुरादाबाद निवासी चंद्र नागपाल शनिवार को सम्भल पहुंचे। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि 1978 के दंगों से जुड़े एक पुराने कुएँ की खुदाई के दौरान यदि अस्थियां मिलती हैं, तो उन्हें सौंपी जाएं। नागपाल इन अस्थियों का विधिवत अंतिम संस्कार करना चाहते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि ये उनके परिजनों या परिचितों की हो सकती हैं, जो 1978 की हिंसा में मारे गए थे। चंद्र नागपाल ने बताया कि उन्हें अपने पिता के निधन के बाद सम्भल में पैतृक संपत्ति होने की जानकारी मिली थी। बराई गाँव में उनके परिवार की लगभग 90 बीघा जमीन, सैफखाँ सराय में करीब 4 एकड़ भूमि, पुराने मकान और दुकानें अभी भी दर्ज हैं। वे इन संपत्तियों की स्थिति का सत्यापन करने सम्भल आए थे। नागपाल के अनुसार, 1978 के दंगों के बाद हालात इतने बिगड़ गए थे कि उनका पूरा कारोबार तबाह हो गया था। इसी कारण उन्हें सम्भल छोड़कर मुरादाबाद में बसना पड़ा था। नागपाल ने 1978 के दंगों का विवरण देते हुए बताया कि एक सुबह अचानक एक बड़ी भीड़ बाजार में घुस आई थी। दुकानों में आग लगा दी गई, लूटपाट की गई और जो भी सामने आया, उसे पीटा गया। उन्होंने कहा, “हमारी दुकानें लूट ली गई थीं, कारोबार खत्म हो गया था। हमारे पास कुछ भी नहीं बचा था। उन्होंने उस समय की एक घटना का उल्लेख किया, जिसमें प्रसिद्ध छंगामल की कोठी में शीरे की कोठरी के भीतर 40 लोगों को कथित तौर पर जिंदा दफन कर दिया गया था। नागपाल के अनुसार, जब उन शवों को शीरे से निकाला गया था, तब का दृश्य भयावह था। नागपाल ने यह भी बताया कि दंगों से पहले हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर रहते थे। उन्होंने कहा, “हम एक ही थाली में रोटी खाते थे, कई मुस्लिम मित्र परिवार जैसे थे। लेकिन 1978 के बाद सब बदल गया।
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