कानपुर देहात के डेरापुर तहसील में शनिवार को आयोजित जिला स्तरीय संपूर्ण समाधान दिवस में प्रशासनिक उदासीनता देखने को मिली। जिलाधिकारी कपिल सिंह और पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेंद्र पांडेय की मौजूदगी में सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चली सुनवाई में कुल 212 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, लेकिन मौके पर केवल 6 शिकायतों का ही निस्तारण हो सका। शेष फरियादियों को आश्वासन देकर लौटा दिया गया। प्राप्त शिकायतों में सर्वाधिक 88 मामले राजस्व विभाग से संबंधित थे। इसके अतिरिक्त, पुलिस विभाग से 28, विद्युत विभाग से 24, पंचायती राज से 15 और विकास विभाग से 1 प्रकरण सामने आया। अन्य विभागों की भी दर्जनों शिकायतें लंबित रहीं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए। समाधान दिवस में दबंगई और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी सामने आए। वार्ड नंबर 8, शंकर नगर निवासी मोहम्मद आसिफ खान ने नगर पंचायत अध्यक्ष पति और सभासद पर रास्ते की जमीन पर अवैध कब्जा कराने तथा दबंगों से धमकाने का आरोप लगाया। अकारू गांव के मनीष सिंह ने शिकायत की कि उनके पड़ोसी घर के सामने गंदा पानी बहाते हैं और विरोध करने पर मारपीट व झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देते हैं। सिंहुठा निवासी महेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें 2023 में मिले आवास की मजदूरी अब तक नहीं मिली है। उन्होंने प्रधान और सचिव पर लापरवाही बरतने तथा कई बार शिकायतों को दबाने का आरोप लगाया।
खल्ला निवासी कृष्ण मोहन शुक्ला ने ब्लॉक डेरापुर में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने 20-25 लाख रुपये के कार्यों में बिना टेंडर निर्माण, फर्जी खरीद, अटल प्रतिमा के नाम पर 8 लाख रुपये के गबन और एक बड़े बाबू के घर में सरकारी एसी लगे होने जैसे गंभीर आरोप लगाए। फरियादियों ने इन सभी मामलों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। समाधान दिवस में एडीएम न्यायिक दिग्विजय सिंह, सीएमओ डॉ. ए.के. सिंह, एसडीएम सुरभि शर्मा, सीओ सौरभ वर्मा, तहसीलदार जितेंद्र कुमार सिंह और बीडीओ विश्राम सिंह सहित कई अधिकारी उपस्थित थे। हालांकि, जनता को कोई ठोस राहत नहीं मिल पाई। फरियादियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि “समाधान दिवस कागजों में सफल है, हकीकत में फेल।”
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