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सपा ने फॉर्म-7 में धांधली का आरोप लगाया:सुल्तानपुर में मतदाता सूची से नाम हटाने के खिलाफ प्रदर्शन

सुल्तानपुर में समाजवादी पार्टी (सपा) ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। पार्टी ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे ‘फॉर्म-7’ में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाया। इस संबंध में, सपा ने डीएम के माध्यम से भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित एक मांग पत्र सौंपा। मांग पत्र में सपा ने आरोप लगाया कि जिले की विभिन्न विधानसभाओं में लोकतंत्र की शुचिता को खंडित करने का एक संगठित प्रयास किया जा रहा है। पार्टी के अनुसार, गाँवों और नगरों में ‘प्री-प्रिंटेड’ फॉर्म-7 थोक में जमा किए जा रहे हैं। इन फॉर्मों में एक ही लिखावट और छपे-छपाए विवरण पाए गए हैं, जो बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के पास बड़ी संख्या में पहुँच रहे हैं। सपा का दावा है कि ये आपत्तियां व्यक्तिगत नहीं हैं, बल्कि एक राजनीतिक दल द्वारा प्रायोजित थोक फर्जीवाड़ा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि एक विशेष रणनीति के तहत पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) समाज के वैध मतदाताओं को चिन्हित किया जा रहा है। उनके नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए फॉर्म-7 भरे जा रहे हैं, जिसे एक वर्ग विशेष के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया गया है। पहले 2 तस्वीरें देखिए… पार्टी द्वारा सौंपे गए साक्ष्यों में यह भी बताया गया है कि सैकड़ों फॉर्म-7 एक ही व्यक्ति द्वारा आपत्तिकर्ता के रूप में भरे गए हैं। इन फॉर्मों पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान संदिग्ध पाए गए हैं। कई मामलों में तो आपत्तिकर्ता उस क्षेत्र का निवासी भी नहीं है, जहाँ के मतदाताओं के नाम हटाने की आपत्ति दर्ज की गई है। सपा ने ‘इलेक्टोरल रोल्स मैनुअल-2023’ का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी मतदाता का नाम काटने से पहले उसे नोटिस देना और एक सप्ताह तक सार्वजनिक सूचना चस्पा करना अनिवार्य है। हालांकि, पार्टी का आरोप है कि प्रशासन पर दबाव डालकर बिना किसी भौतिक सत्यापन के ही नाम काटने की तैयारी की जा रही है। सपा ने मांग की है कि थोक में जमा किए गए या संदिग्ध आपत्तिकर्ता विवरण वाले सभी ‘फॉर्म-7’ को तत्काल निरस्त किया जाए। पार्टी ने यह भी कहा कि फर्जी फॉर्म भरने वाले साजिशकर्ताओं पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-31 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए। पार्टी ने यह भी मांग की कि यदि किसी नाम पर आपत्ति दर्ज की जाती है, तो उसका सत्यापन संबंधित मतदाता की उपस्थिति में वीडियोग्राफी के साथ किया जाए। सपा ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस संगठित चुनावी अपराध पर तत्काल कठोर कार्रवाई नहीं की, तो वे जन-आंदोलन के साथ-साथ माननीय उच्च न्यायालय और भारत निर्वाचन आयोग का रुख करेंगे। यहां पर सपा जिलाध्यक्ष रघुवीर यादव, सपा प्रवक्ता अनूप संडा, वरिष्ठ सपा नेता मोहम्मद रिजवान उर्फ पप्पू, पूर्व विधायक भगेलू राम, तेजिंदर सिंह बग्गा, राजू चौधरी, ज्ञान यादव, सलाउद्दीन आदि मौजूद रहे।


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