उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पुलिस मुख्यालय में दो दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत शनिवार से हुई। ये कार्यशाला यातायात निदेशालय, उत्तर प्रदेश और इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन (IRTE) फरीदाबाद के सहयोग से आयोजित की गई है। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में सड़क हादसों में कमी लाना और सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या को कम से कम करना है। कार्यशाला में सड़क सुरक्षा के पांच मूलभूत स्तंभों एजुकेशन, एनफोर्समेंट , इंजीनियरिंग, इमरजेंसी केयर और इनवायरनमेंट पर विशेष फोकस किया जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट में मिले अच्छे नतीजे डीजीपी के प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश में जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (ZFD) कार्यक्रम नवंबर 2025 में शुरू किया गया था। पहले चरण में 20 जनपदों के 242 क्रिटिकल थानों में 89 क्रिटिकल कॉरिडोर और 3233 क्रिटिकल क्रैश लोकेशनों की पहचान की गई। केंद्रित पेट्रोलिंग, गहन जांच और अन्य उपायों से इन क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम मिले हैं। अब ZFD के दूसरे चरण में शेष 55 जनपदों के 245 क्रिटिकल थानों को शामिल किया गया है। इस कार्यशाला में इन 55 जनपदों से 44 राजपत्रित अधिकारी (यातायात), 55 निरीक्षक/उपनिरीक्षक (यातायात) और 55 क्रिटिकल कॉरिडोर टीम प्रभारी भाग ले रहे हैं। डॉ. रोहित बलूजा, अध्यक्ष IRTE और उनकी विशेषज्ञ की टीम ने प्रतिभागियों को सड़क दुर्घटना जांच की नवीनतम वैज्ञानिक पद्धतियों की ट्रेनिंग दी जा रही है। हादसों में कमी के लिए जन जागरुकता और सख्त परिवर्तन जरूरी उद्घाटन सत्र में डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी के लिए निरंतर जन-जागरूकता और सख्त प्रवर्तन सबसे जरूरी है। उन्होंने ‘यातायात माह’ को नवंबर तक सीमित न रखकर पूरे साल चलाने की बात कही। नगर निगमों से ब्लैक स्पॉट्स पर स्थायी होर्डिंग्स लगवाने और सोशल मीडिया से प्रचार का सुझाव दिया। उन्होंने अलीगढ़-बुलंदशहर, कानपुर-हमीरपुर और लखनऊ-सीतापुर मार्गों पर ZFD पायलट प्रोजेक्ट की सफलता साझा की, जहां मात्र 2 महीनों में दुर्घटनाओं में 30% से 58% तक कमी आई। उन्होंने जोर दिया कि भारी जुर्माने से ज्यादा हर उल्लंघन पर तत्काल दंड जरूरी है। तकनीकी उपायों जैसे मोबाइल अलर्ट, एआई कैमरे और ऑटोमैटिक चालान को और प्रभावी बनाने की बात कही। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर हो जांच डॉ. रोहित बलूजा ने पुलिस और परिवहन विभाग के बीच बेहतर समन्वय पर बल दिया। जांच को वैज्ञानिक, तथ्य-आधारित और तकनीकी साक्ष्यों पर आधारित बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता को मोटर व्हीकल एक्ट से जोड़कर मजबूत केस बनाने का सुझाव दिया। ‘ट्रेनर्स को ट्रेन’ मॉडल अपनाने की बात कही। इस मौके पर एडीजी ट्रैफिक ए. सतीश गणेश ने प्रतिभागियों को सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी।
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