प्रयागराज के अरैल क्षेत्र स्थित श्री सच्चा बाबा आश्रम में शुक्रवार को 50 से अधिक बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न हुआ। इस समारोह में बटुक ब्रह्मचारियों ने वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ जनेऊ धारण किया। इसके साथ ही उन्होंने अपने आध्यात्मिक और संयमित जीवन की शुरुआत की। कार्यक्रम का नेतृत्व आश्रम के महंत एवं संरक्षक स्वामी डॉ. चंद्र देव जी महाराज ने किया। उन्होंने बटुकों को मंत्र दीक्षा देते हुए यज्ञोपवीत संस्कार के महत्व पर प्रकाश डाला। स्वामी जी ने बताया कि यह संस्कार भारतीय सनातन संस्कृति के सोलह संस्कारों में से एक है, जो बालक को ज्ञान, अनुशासन और आत्मसंयम की ओर अग्रसर करता है।
स्वामी डॉ. चंद्र देव जी महाराज ने बटुकों को गायत्री मंत्र की महत्ता समझाई और उन्हें त्रिकाल संध्या, स्वाध्याय तथा सदाचार का पालन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में ऐसे संस्कार बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं, जो उनमें ब्रह्मचर्य, सेवा और साधना की भावना विकसित करते हैं। इस उपनयन संस्कार कार्यक्रम में बटुक ब्रह्मचारियों के परिवारजन, आश्रम के अध्यक्ष स्वामी दिव्यानंद जी महाराज, विद्वान आचार्यगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। पूरे परिसर में वेद मंत्रों की गूंज से धार्मिक वातावरण बना रहा। कार्यक्रम के समापन के बाद आश्रम परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं और आगंतुकों ने प्रसाद ग्रहण किया। भक्तों ने इस धार्मिक आयोजन के प्रति उत्साह व्यक्त किया और इसकी सराहना की।
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