संभल हिंसा से जुड़े मोहम्मद बिलाल हत्याकांड की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। उत्तर प्रदेश के संभल जिला न्यायालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल का उपयोग कर इंस्पेक्टर राजीव कुमार मलिक के बयान दर्ज किए गए। वह AI टूल के माध्यम से गवाही देने वाले राज्य के पहले इंस्पेक्टर बन गए हैं। यह सुनवाई शुक्रवार को संभल जनपद के चंदौसी कोतवाली स्थित जिला न्यायालय में हुई। जिला जज डॉ. विदुषी सिंह ने 24 नवंबर 2024 को हुए संभल के विवादित धार्मिक स्थल श्रीहरिहर मंदिर बनाम शाही जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा में मृतक मोहम्मद बिलाल की हत्या के मामले पर सुनवाई की। इस दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल और सीजेएम दीपक कुमार जायसवाल भी उपस्थित रहे।
संभल कोतवाली पुलिस ने बिलाल की हत्या के संबंध में मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में संभल हिंसा के कथित मास्टरमाइंड शारिक साठा के दो गुर्गे, मुल्ला अफरोज और गुलाम मोहम्मद, मुरादाबाद जेल में बंद हैं। इन दोनों पर बिलाल की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने बताया कि जिला जज डॉ. विदुषी सिंह ने AI टूल का उपयोग कर बयान दर्ज किए। उल्लेखनीय है कि 19 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट चंदौसी में प्रस्तुत किया गया था। न्यायालय के आदेश पर उसी दिन शाम को पहले चरण का सर्वे हुआ, जबकि दूसरा चरण 24 नवंबर 2024 को संपन्न हुआ। दूसरे चरण के सर्वे के दौरान हजारों की संख्या में लोग एकत्र हो गए, जिससे सर्वे बाधित हुआ और हिंसा भड़क उठी। पुलिस पर पथराव और फायरिंग की गई, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। इस घटना में एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, सीओ अनुज चौधरी और डिप्टी कलेक्टर सहित 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। संभल कोतवाली एवं थाना नखासा में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क एवं सपा विधायक इक़बाल महमूद के बेटे सुहैल इक़बाल सहित कई लोगों को नामजद करते 2750 से अधिक लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया। जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट सहित 134 अभियुक्तों को जेल भेज चुकी है जिसमें 3 महिलाएं और संभल हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता फरार गैंगस्टर शारिक साठा के तीन गुर्गे मुल्ला अफरोज, वारिस एवं गुलाम भी शामिल है। हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जफर अली को बीती 1 अगस्त 2024 को मुरादाबाद जेल से रिहा कर दिया गया था, 24 मार्च को उन्हें जेल भेजा गया था और 131 दिन के बाद जेल से बाहर आए।
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