संभल में सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने के बाद निकले मलबे को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। अधिवक्ता डॉ. अमित कुमार उठबाल ने गुरुवार को पुलिस और प्रशासन के कुछ कर्मचारियों पर सरकारी संपत्ति की लूट का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की। डॉ. अमित कुमार उठबाल ने बताया कि जनपद के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीमों ने सरकारी संपत्तियों पर बने अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर कब्जा मुक्त कराया था। उन्होंने इस कार्रवाई को सराहनीय और कानूनसम्मत बताया, जिससे यह संदेश गया कि सरकार अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त और निष्पक्ष है। वित्तीय अनियमितता और सरकारी संपत्ति की सीधी लूट हालांकि, अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि ध्वस्तीकरण के दौरान निकले मलबे, जिसमें ईंटें, खिड़की-दरवाजे, गाटर, पट्टियां और सरिया शामिल थे, की नियमानुसार नीलामी नहीं की गई। नियमानुसार, इससे प्राप्त धनराशि को सरकारी खजाने में जमा किया जाना चाहिए था। डॉ. उठबाल का दावा है कि ध्वस्त किए गए अवैध निर्माणों से निकली निर्माण सामग्री को पुलिस और प्रशासन के कुछ कर्मचारियों ने आपस में बांटकर निजी उपयोग में ले लिया। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को गंभीर वित्तीय अनियमितता और सरकारी संपत्ति की सीधी लूट बताया। अधिवक्ता ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया जाए। उन्होंने कहा कि जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। डॉ. उठबाल ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता के बीच सरकार की निष्पक्ष नीति पर सवाल उठेंगे और प्रशासन पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा। उन्होंने प्रशासन से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की।
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