संभल की शाही जामा मस्जिद में रमजान माह के मद्देनजर लाउडस्पीकर लगाने की मांग की गई है। मस्जिद सदर जफर अली ने सोमवार को जिलाधिकारी (डीएम) को इस संबंध में एक प्रार्थना पत्र सौंपा है। इसमें सरकारी ध्वनि मानकों के अनुसार लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति मांगी गई है, ताकि नमाजियों तक इमाम की आवाज आसानी से पहुंच सके। यह नया प्रकरण संभल कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कोट पूर्वी स्थित शाही जामा मस्जिद बनाम श्रीहरिहर मंदिर से जुड़ा है, जिसे एक विवादित धार्मिक स्थल माना जाता है। संभल हिंसा के अभियुक्त और मस्जिद सदर जफर अली ने अपने ज्ञापन में कहा है कि मस्जिद में नमाज पढ़ रहे इमाम की आवाज हर नमाजी तक पहुंचना आवश्यक है, इसलिए लाउडस्पीकर लगाना जरूरी है। प्रार्थना पत्र की एक प्रति संभल के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को भी भेजी गई है। सदर जफर अली ने बताया कि पवित्र रमजान का महीना 18 फरवरी से शुरू हो रहा है। इस दौरान अलविदा जुमे की नमाज के अलावा अन्य जुम्मे और प्रतिदिन भी नमाज अदा की जाती है। उन्होंने कहा कि नमाजियों को इमाम साहब की आवाज स्पष्ट रूप से सुनाई दे, और किसी प्रकार का भ्रम पैदा न हो, इसके लिए लाउडस्पीकर की मांग की गई है। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि इसमें सरकारी ध्वनि मानकों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि 19 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट चंदौसी में पेश किया गया था। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन शाम को पहले चरण का सर्वे हुआ था, जिसके बाद 24 नवंबर 2024 को दूसरे चरण का सर्वे किया गया। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हो गए थे, जिससे सर्वे बाधित हुआ और हिंसा भड़क गई थी। पुलिस पर पथराव और फायरिंग की गई थी, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना में एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, सीओ अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर सहित 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
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