संभल के एक विवादित धार्मिक स्थल पर रमजान माह के दौरान लाउडस्पीकर लगाने की मांग को जिलाधिकारी (डीएम) ने अस्वीकार कर दिया है। मस्जिद सदर ने इस संबंध में एक प्रार्थना पत्र दिया था, जिसमें सरकारी ध्वनि मानकों का पालन करते हुए लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति मांगी गई थी। मंगलवार को डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने संभल कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कोट पूर्वी स्थित शाही जामा मस्जिद बनाम श्रीहरिहर मंदिर पर लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। यह धार्मिक स्थल विवादित है और इसका मामला चंदौसी कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। बीते सोमवार को संभल हिंसा के अभियुक्त और मस्जिद सदर जफर अली ने डीएम को एक पत्र सौंपा था। इसमें रमजान माह में शाही जामा मस्जिद में एक लाउडस्पीकर लगवाने की मांग की गई थी। प्रार्थना पत्र में कहा गया था कि इमाम की आवाज मस्जिद में नमाज पढ़ रहे सभी नमाजियों तक आसानी से पहुंच सके, जिसके लिए लाउडस्पीकर आवश्यक है। इसमें सरकारी ध्वनि मानकों का पालन करने का भी दावा किया गया था। इस प्रार्थना पत्र की एक प्रति एसपी संभल को भी भेजी गई थी। सदर जफर अली ने बताया कि पवित्र रमजान का महीना 18 फरवरी से शुरू हो रहा है। उन्होंने कहा कि नमाजियों को इमाम की आवाज आसानी से सुनाई दे और कोई भ्रम पैदा न हो, इसलिए लाउडस्पीकर की मांग की गई थी। जफर अली ने यह भी कहा कि उन्हें अभी तक लिखित में कोई जानकारी नहीं मिली है। यदि प्रशासन मना करता है, तो कमेटी के लोगों के साथ बैठक कर अगली रणनीति तय की जाएगी। उल्लेखनीय है कि हिंदू पक्ष की ओर से 19 नवंबर 2024 को सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट, चंदौसी में जामा मस्जिद को श्री हरिहर मंदिर होने का दावा पेश किया गया था। 24 नवंबर 2024 को इस स्थल के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी। मस्जिद सर्वे का यह मामला सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचा था, जहां इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस धार्मिक स्थल को विवादित करार दिया था।
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