सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर संभल के बहजोई और बबराला में विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें साध्वी प्राची ने भाग लिया। ‘जिहाद’ के मुद्दे पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने बेटियों से देशभक्ति के गानों पर रील बनाने और ‘जिहादियों’ से दूर रहने का आह्वान किया। इस दौरान महिलाओं ने उन्हें तलवार भेंट कर स्वागत किया। साध्वी प्राची ने अपने संबोधन में कहा कि “बेटी, देशभक्ति के गानों पर ऐसी रील बनाओ कि आपके पिता का सीना चौड़ा हो जाए और असजद जैसे ‘जिहादियों’ की रेल बनाओगी।” उन्होंने युवाओं से भी सनातनी बहू लाने और अपनी बेटियों को बचाने का संकल्प लेने का आग्रह किया। साध्वी प्राची ने अपने समाज, सनातनियों और बेटियों के प्रति चिंता व्यक्त की। बेटियां ‘जिहादी’ के जाल में फंसकर माता-पिता नहीं पहचानती उन्होंने दावा किया कि हजारों बेटियां ‘लव जिहाद’ के जाल में फंसी हुई हैं। साध्वी प्राची ने इस बात पर गहरा दुख जताया कि जब बेटियां ‘जिहादी’ के जाल में फंसने के बाद थाने में अपने माता-पिता को पहचानने से इनकार करती हैं। उन्होंने बेटियों को याद दिलाया कि उन्हें उस मां को नहीं भूलना चाहिए जिसने उन्हें नौ महीने गर्भ में रखा और उस पिता को भी नहीं, जिसने अपनी जरूरतों को दरकिनार कर उनकी इच्छाएं पूरी कीं। बेटियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें ‘बुर्के वाली’ नहीं बनना चाहिए। उन्होंने माता-पिता का अपमान कर ‘जिहादी’ जाल में फंसने वाली लड़कियों पर दुख व्यक्त किया। साध्वी प्राची ने बेटियों से काली, कल्याणी, दुर्गा और भवानी बनने का आह्वान किया, लेकिन स्पष्ट रूप से कहा कि वे कभी भी बुर्के वाली न बनें। उन्होंने उपस्थित लोगों से इस बात का संकल्प लेने को कहा। उन्होंने ‘कॉन्वेंट संस्कृति’ की आलोचना करते हुए कहा कि आज परिवारों को एकजुट रखने की आवश्यकता है।बच्चों को गुरुकुल, शिशु मंदिर, विद्या मंदिर या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में भेजने के बजाय कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ाने के चलन पर चिंता जताई। उन्होंने तर्क दिया कि कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे फर्राटेदार अंग्रेजी बोल सकते हैं, लेकिन वे भगत सिंह या सुभाष चंद्र बोस जैसे स्वतंत्रता सेनानी नहीं बनेंगे। उनके अनुसार, ऐसे बच्चे केवल ‘नौकर’ बनेंगे, ‘मालिक’ नहीं।
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