नगर पंचायत मगहर के विभिन्न वार्डों में लाल मुंह के बंदरों के उत्पात से परेशान निवासियों को राहत दिलाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता पुष्पेश नंदन रावत ने पहल की है। उन्होंने अधिशासी अधिकारी (ईओ) नगर पंचायत मगहर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश की अवहेलना का आरोप लगाया है। यह आदेश 27 नवंबर 2025 को जारी किया गया था, जिसमें बंदरों के उत्पात को नियंत्रित करने का निर्देश दिया गया था। रावत ने ईओ नगर पंचायत मगहर के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, जिलाधिकारी, अध्यक्ष नगर पंचायत मगहर, प्रभागीय वनाधिकारी और क्षेत्रीय वन अधिकारी खलीलाबाद को पत्र भेजे हैं। इन पत्रों में उन्होंने व्यापक जनहित में हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने मगहर कस्बे के विभिन्न वार्डों से सभी बंदरों को पकड़कर गोरखपुर के कुसमी जंगल में छोड़ने के लिए तत्काल अभियान चलाने का आग्रह किया है। ईओ नगर पंचायत मगहर को भेजे गए अपने पत्र में, रावत ने कहा कि उनके पूर्व के प्रार्थना पत्रों और वन विभाग के पत्रों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मगहर कस्बे के विभिन्न वार्डों से लाल मुंह के बंदरों के झुंड को पकड़कर कुसमी जंगल में छोड़ने के उनके बार-बार के निवेदन को अनसुना कर दिया गया। रावत ने बताया कि 24 मार्च 2025 को एक शॉर्ट टर्म टेंडर जारी किया गया था और वर्क ऑर्डर भी दिया गया था, जिसके तहत कुछ बंदरों को पकड़कर पास के जंगल में छोड़ा गया। अधिकारियों ने यह भी कहा था कि यह प्रक्रिया जारी रहेगी और एक अखबार की कटिंग भी पेश की गई थी, जिसमें 80 बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़ने की बात कही गई थी। हालांकि, रावत का आरोप है कि यह केवल एक बार की कार्रवाई थी और कोर्ट को गुमराह करने के लिए फर्जी खबर छपवाई गई थी। कोर्ट ने इस स्थिति को देखते हुए प्रतिवादियों से अपेक्षा की थी कि वे बंदरों को पकड़ने और उन्हें जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया जारी रखेंगे। रावत ने चेतावनी दी है कि यदि पूरे मगहर में व्यापक पैमाने पर अभियान चलाकर सभी लाल मुंह के बंदरों को पकड़कर जंगलों में नहीं छोड़ा जाता है, तो वह इस मामले में दोबारा कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
https://ift.tt/FjUcIJQ
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply