संतकबीरनगर जिले के धनघटा थाना क्षेत्र के संठी गांव में शनिवार सुबह एक किसान ने कथित तौर पर चकबंदी विभाग की कार्यप्रणाली से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। 47 वर्षीय किसान प्रभुनाथ प्रजापति का शव उनके पुराने घर में मफलर के फंदे से लटका मिला। परिजनों ने आरोप लगाया है कि चकबंदी अधिकारियों ने किसान की सड़क किनारे स्थित कीमती जमीन को काटकर एक ताल (पोखरे) में डाल दिया था, जिससे वह गहरे मानसिक तनाव में थे। मृतक के परिजनों के अनुसार, प्रभुनाथ पिछले कई महीनों से अपनी जमीन के संबंध में न्याय के लिए तहसील और चकबंदी कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। अधिकारियों के सामने गुहार लगाने के बावजूद उन्हें केवल आश्वासन ही मिलता रहा। जब उनकी उम्मीदें पूरी तरह टूट गईं, तो उन्होंने शनिवार सुबह करीब 7:30 बजे यह कदम उठाया। परिजनों का आरोप है कि चकबंदी विभाग के अधिकारियों ने कथित भ्रष्टाचार या मनमानी के चलते उनकी मुख्य मार्ग वाली उपजाऊ जमीन को छीनकर उसे ताल की बंजर जमीन में बदल दिया। किसान इसी बात को लेकर चिंतित थे कि अब उनके परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा। प्रभुनाथ अपने घर के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनकी मृत्यु के बाद पत्नी कमलेश देवी, तीन बेटों और वृद्ध माता गीता देवी का बुरा हाल है। गांव में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है। सूचना मिलने पर धनघटा पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
इस घटना ने चकबंदी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते किसान की शिकायत सुनी जाती, तो आज वह जीवित होते। अब यह देखना होगा कि प्रशासन दोषी अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई करता है या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा। वहीं पर इस मामले को लेकर जब एसडीएम धनघटा डॉ सुनील कुमार से हुई तो उन्होंने बताया मामला संज्ञान में आया है और यह अत्यंत दुखद घटना है। किसान की जमीन से जुड़े चकबंदी के अभिलेखों की जांच कराई जा रही है। यदि चकबंदी प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर नियम विरुद्ध कार्य या लापरवाही पाई गई, तो संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित परिवार को हर संभव सरकारी सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा।”
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