कबीर-मगहर महोत्सव का रविवार शाम भोजपुरी संगीत के नाम रहा। प्रसिद्ध लोक गायिका कल्पना पटवारी के मंच पर आते ही पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। कल्पना पटवारी ने कार्यक्रम की शुरुआत कबीर निर्गुण भजन से की। अतिथियों ने स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र भेंट कर उनका स्वागत किया। उनकी पारंपरिक लोक शैली पूर्वी की प्रस्तुति ने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। इसके बाद उन्होंने “पागल कहे ला ना गया” और दर्शकों की मांग पर “बलमुआ कैसे रे तेजब छोटी नददी” जैसे गीत प्रस्तुत किए। जब कल्पना ने “ई झूलनी के छैया बलम तू पहरिया बिताई दा हो” गाया, तो भीड़ बेकाबू हो गई। दर्शक हूटिंग करते हुए मंच की ओर बढ़ने लगे। 3 तस्वीरें देखिए… मौके पर मौजूद पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद गायिका ने “एगो नेबुआ दो चार गो मिर्ची लटका ला चोटी में” और फिल्म ‘नदियां के पार’ का गीत “कौने दिशा” प्रस्तुत किया। उन्होंने शिव भजन “झूम रहे हैं पवन गूंज को सुनके पृथ्वीवासी, बम बम बोल रहा है काशी…” गाकर भी खूब तालियां बटोरीं। कल्पना ने अपने साथी कलाकार के साथ “जइसन सोचले रहनि ऐइसन धनिया मोर बाड़ी, साबर ना गोर बाड़ी हो…” पर युगल गीत गाया। उन्होंने भोजपुरी फिल्मों के गीत “कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया…” सहित कई अन्य प्रस्तुतियां दीं। गीतों का यह सिलसिला देर रात तक जारी रहा, जिससे महोत्सव की अंतिम रात संगीतमय बनी रही। दर्शकों को कहा धन्यवाद : वहीं, गीतों की मधुर श्रृंखला के बीच कल्पना पटवारी ने भोजपुरी संस्कृति की महक बिखेरी और लोगों से जुड़ाव का संदेश दिया। उनके गीतों पर दर्शक झूम उठे और महोत्सव की ये रात एक यादगार और कभी न भूलने वाला अनुभव बन गई। उन्होंने दर्शकों को धन्यवाद कहा। दर्शकों को कहा धन्यवाद : वहीं, गीतों की मधुर श्रृंखला के बीच कल्पना पटवारी ने भोजपुरी संस्कृति की महक बिखेरी और लोगों से जुड़ाव का संदेश दिया। उनके गीतों पर दर्शक झूम उठे और महोत्सव की ये रात एक यादगार और कभी न भूलने वाला अनुभव बन गई। उन्होंने दर्शकों को धन्यवाद कहा।
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