श्रावस्ती में बाल श्रम मुक्त जिला बनाने के उद्देश्य से एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला कलेक्ट्रेट सभागार में श्रम विभाग, ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट और मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में हुई। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि बाल श्रम मुक्त जिला बनाने में व्यापार संगठनों, ईंट भट्ठा एसोसिएशन, रेस्टोरेंट संचालकों और व्यापारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी प्रतिष्ठानों से बाल श्रम न होने का संकल्प लेने की अपील की।सीडीओ ने अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में सघन अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यशाला से बनी कार्ययोजना को लागू करने के लिए सभी विभागों को समन्वय से काम करना होगा। शिक्षा से वंचित बच्चों का सर्वे कर उन्हें स्कूलों में नामांकित करना और मुख्यधारा से जोड़ना शिक्षा विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।सीडीओ ने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचना चाहिए। श्रमायुक्त कार्यालय, श्रम संसाधन केंद्र के राज्य समन्वयक सैयद रिजवान अली ने बाल श्रम कानूनों और विभागीय सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बाल श्रम एक सामाजिक बुराई होने के साथ-साथ दंडनीय अपराध भी है। रिजवान अली ने इस बुराई को समाप्त करने के लिए प्रशासन, समाज और स्वयंसेवी संगठनों से मिलकर ठोस प्रयास करने का आह्वान किया।उप श्रमायुक्त अनुभव वर्मा ने बताया कि शासन की मंशा के अनुरूप श्रावस्ती को निर्धारित समय सीमा के भीतर बाल श्रम मुक्त बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान के सहायक निदेशक डॉ. राजकुमार कुशवाहा ने जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों को साझा किया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान और बच्चों को स्कूल से जोड़ने की प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया। कार्यशाला में यह भी जानकारी दी गई कि राज्य स्तर पर ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट और श्रम विभाग के बीच पांच आकांक्षी जिलों को वर्ष 2026 तक बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए लिखित सहमति हुई है।वहीं बाल श्रम उन्मूलन जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह रथ पूरे जिले में भ्रमण कर समुदाय को बाल श्रम के प्रति जागरूक करेगा।
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