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शिशु की मौत केस में जांच निर्णायक मोड़ पर:1 जनवरी को आशा का बयान, दो दिन में डीएम को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

सिद्धार्थनगर के बर्डपुर स्थित श्री साईं फार्मा क्लिनिक में इलाज के नाम पर गर्भस्थ शिशु की मौत के मामले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। 19 दिसंबर को दैनिक भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संज्ञान लिया था। डीएम के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रजत कुमार चौरसिया ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की, जो लगातार घटनाक्रम की सभी कड़ियों को जोड़ते हुए जांच कर रही है। जांच अधिकारी एवं एडिशनल सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि पूरे प्रकरण में आशा कार्यकर्ता की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इसी क्रम में गुरुवार, 1 जनवरी को आशा का बयान दर्ज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आशा का बयान सामने आने के बाद जांच को अंतिम रूप दिया जाएगा और इसके दो दिन के भीतर जांच आख्या जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी। 30 अक्टूबर से जुड़ा है पूरा मामला जांच में सामने आया है कि पूरा मामला 30 अक्टूबर से जुड़ा हुआ है। उस दिन पीड़िता अपने पति के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बर्डपुर पहुंची थी। वहां जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया था कि अभी डिलीवरी का समय पूरा नहीं हुआ है। इसके बावजूद पीड़िता को सरकारी अस्पताल से हटाकर प्राइवेट श्री साईं फार्मा क्लिनिक ले जाया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरी प्रक्रिया में आशा कार्यकर्ता की अहम भूमिका रही, जिसकी पुष्टि उसके बयान के बाद की जाएगी। खबर के बाद हरकत में आया प्रशासन 19 दिसंबर को मामला उजागर होने के बाद जिलाधिकारी ने तुरंत संज्ञान लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद सीएमओ ने तीन सदस्यीय चिकित्सकीय टीम का गठन किया। टीम में एडिशनल सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता, बर्डपुर सीएचसी अधीक्षक डॉ. सुबोध चंद्र सहित एक अन्य वरिष्ठ चिकित्सक को शामिल किया गया। क्लीनिक जांच में मिले गंभीर तथ्य जांच टीम के निरीक्षण में श्री साईं फार्मा क्लीनिक पर न तो कोई पंजीकृत डॉक्टर मौजूद मिला और न ही डिलीवरी या ऑपरेशन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध पाए गए। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि क्लीनिक के पास केवल मेडिकल स्टोर का लाइसेंस है। ऐसे में वहां कराई गई डिलीवरी और कथित “छोटा ऑपरेशन” स्वास्थ्य नियमों का गंभीर उल्लंघन माने जा रहे हैं। 15 हजार देकर वीडियो बनवाने का आरोप भी जांच में शामिल पीड़िता के पति द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। आरोप है कि 19 दिसंबर को उन्हें क्लीनिक बुलाकर 15 हजार रुपए दिए गए, उनका वीडियो बनवाया गया और हस्ताक्षर कराए गए। बाद में उनसे रुपए छीन लिए गए। जांच अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम को सबूतों से छेड़छाड़ और दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों में इलाज की भी होगी समीक्षा गलत इलाज के बाद पीड़िता को पहले माधव प्रसाद तिवारी मेडिकल कॉलेज और बाद में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। जांच टीम वहां हुए इलाज की प्रक्रिया और चिकित्सकीय प्रबंधन की भी समीक्षा कर रही है। एडिशनल सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि आशा का बयान दर्ज होने के बाद सभी तथ्यों को जोड़कर जांच पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद दो दिन के भीतर जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी। फिलहाल यह मामला जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है और अब सभी की नजरें जांच आख्या पर टिकी हुई हैं।


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