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शस्त्र लाइसेंस आवेदन पर साइबर ठगी का मामला:मुजफ्फरनगर में विधायक ने DM को पत्र लिखा, गोपनीय जानकारी लीक होने की आशंका

मुजफ्फरनगर जिले में शस्त्र लाइसेंस आवेदन के नाम पर एक व्यक्ति से साइबर ठगी का मामला सामने आया है। घटना के बाद जिलाधिकारी कार्यालय से गोपनीय जानकारी लीक होने की आशंका जताई जा रही है। खतौली विधायक मदन भैया ने इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र लिखकर गहन जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। ब्रह्मपुरी निवासी मनोज पवार ने शस्त्र लाइसेंस के लिए जिलाधिकारी कार्यालय में आवेदन किया था। उनके आवेदन के साथ विधायक मदन भैया का सिफारिशी पत्र भी संलग्न था। विधानसभा सत्र के दौरान लखनऊ में मौजूद विधायक मदन भैया के मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉलर आईडी पर ‘डीएम ऑफिस’ प्रदर्शित हो रहा था। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को जिलाधिकारी कार्यालय का कर्मचारी बताया और कहा कि मनोज पवार का लाइसेंस स्वीकृत हो गया है। विधायक ने इस जानकारी पर भरोसा करते हुए मनोज पवार को सूचित किया और कॉलर का नंबर भी साझा किया। इसके बाद मनोज पवार ने उस नंबर पर संपर्क किया। ठगों ने विभिन्न बहानों से उनसे पैसे ऐंठ लिए। विधायक ने जताई चिंता, सवाल उठाए मदन भैया ने अपने पत्र में चिंता जताई है कि ठगों को यह जानकारी कैसे मिली कि मनोज पवार ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया था और उनके आवेदन के साथ विधायक का सिफारिशी पत्र भी लगा हुआ था। उन्होंने प्रथम दृष्टया जिलाधिकारी कार्यालय पर संदेह जताया है, क्योंकि आवेदन और संबंधित दस्तावेज वहीं जमा होते हैं। उनका कहना है कि यह जानकारी लीक होना एक गंभीर मामला है। साइबर सुरक्षा पर गंभीर सवाल विधायक के अनुसार, इस तरह की गोपनीय जानकारी का लीक होना भविष्य में बड़े धोखाधड़ी या अन्य अपराधों को जन्म दे सकता है। यह घटना आम नागरिकों का प्रशासन पर भरोसा कम करती है और साइबर अपराधों को बढ़ावा देती है। मदन भैया ने जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर को पत्र लिखकर मामले की गहन जांच की अपील की। उन्होंने उत्तर प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी, प्रमुख सचिव गृह विभाग और एसएसपी मुजफ्फरनगर को भी पत्र भेजा। स्थानीय लोगों में चिंता, उम्मीद विधायक पहल से यह घटना मुजफ्फरनगर में साइबर सुरक्षा की स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। स्थानीय लोग चिंतित हैं कि सरकारी कार्यालयों से जानकारी लीक होने से ठगी के मामले बढ़ सकते हैं। विधायक की पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि जांच से सच सामने आएगा और दोषी बेनकाब होंगे। जांच में कॉलर आईडी स्पूफिंग, फोन नंबर ट्रेसिंग और कार्यालय कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल शामिल हो। दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।


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