ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार और उसके मंत्रियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मठ में विशेष पूजन के बाद मीडिया से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल के मंत्री लगातार उन पर आक्षेप कर रहे हैं और गौवंश, मांस निर्यात तथा बूचड़खानों के मुद्दे पर जनता को गुमराह किया जा रहा है। शंकराचार्य ने घोषणा करते हुए कहा- हम देशभर के साधु-संतों को पत्र लिख रहे हैं। 11 व 12 फरवरी को लखनऊ जाकर आगे की रणनीति तय करेंगे। मंत्रियों के बयानों पर सवाल शंकराचार्य ने मंत्री ओम प्रकाश राजभर और धर्मपाल सिंह सैनी के बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की ओर से यह कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश से केवल भैंस, बकरे और सूअर का मांस निर्यात होता है, गौमांस का नहीं। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि उत्तर प्रदेश से सूअर के मांस का निर्यात होता ही नहीं है, तो फिर यह दावा किस आधार पर किया जा रहा है। हम चाहते हैं कि पहले यह स्पष्ट किया जाए कि सूअर के मांस के निर्यात की बात कितनी सत्य है। यदि यह झूठ है, तो फिर आगे चर्चा का कोई अर्थ नहीं रह जाता।” भैंस के मांस की आड़ में गौमांस निर्यात का आरोप शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि भैंस के मांस के नाम पर लगातार गौमांस विदेशों में भेजा जा रहा है। उन्होंने नोएडा और भोपाल की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा- शुरुआती तौर पर मांस को भैंस का बताया गया, लेकिन लैब टेस्ट में वह गाय का मांस निकला। जब हर बार जांच में भैंस का मांस गाय का निकल जाता है, तो सरकार के दावों पर भरोसा कैसे किया जाए?” बूचड़खानों की संख्या पर उठाए सवाल शंकराचार्य ने योगी सरकार के उस दावे पर भी सवाल खड़े किए, जिसमें अवैध बूचड़खानों को बंद करने की बात कही जाती है। इस मुद्दे पर उन्होंने कहा- मुख्यमंत्री के कार्यभार संभालने के समय प्रदेश में लगभग 40 प्रसंस्कृत मांस निर्यात करने वाले बूचड़खाने थे, जो अब 9 सालों में बढ़कर 70 से अधिक हो गए हैं। उन्होंने पूछा- यह बढ़ोतरी किसके कार्यकाल में हुई? यदि अवैध बूचड़खाने बंद किए गए, तो इनकी संख्या कैसे बढ़ गई?” संन्यासी होकर मांस व्यापार का आरोप शंकराचार्य ने तीखा हमला करते हुए कहा- कोई साधु, सन्यासी या मठाधीश मांस विक्रेता नहीं हो सकता, चाहे वह गाय का हो या भैंस का। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रहते हुए योगी आदित्यनाथ मांस निर्यात से होने वाली आय वाले खजाने से वेतन ले रहे हैं। मुख्यमंत्री को मिलने वाला लगभग पांच लाख रुपये मासिक वेतन उसी खजाने से आता है, जिसमें मांस बिक्री का पैसा जमा होता है। 106 महीनों में लगभग चार करोड़ रुपये वेतन के रूप में लिए जा चुके हैं। क्या यह भगवा वस्त्र और सन्यासी परंपरा का अपमान नहीं है?” ‘आका’ शब्द पर आपत्ति शंकराचार्य ने एक मंत्री द्वारा “आका” शब्द के प्रयोग पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह शब्द अरबी मूल का है और एक हिंदू सन्यासी के संदर्भ में इसका प्रयोग अनुचित है। शंकराचार्य के ऊपर कोई नहीं होता। मंत्री के आका मुख्यमंत्री हो सकते हैं, मुख्यमंत्री के आका राज्यपाल या केंद्र हो सकता है, लेकिन शंकराचार्य का कोई आका नहीं होता। शंकराचार्य पद को लेकर बयान पर प्रतिक्रिया मंत्रियों द्वारा शंकराचार्य पद को असंवैधानिक बताए जाने पर शंकराचार्य ने कहा कि जब शंकराचार्य परंपरा स्थापित हुई थी, तब संविधान अस्तित्व में ही नहीं था, लेकिन राजा थे और उन्होंने यह सम्मान दिया था। जब राजा ने हमें यह पद, सिंहासन और सम्मान दिया, तो आज की सरकारें उसी व्यवस्था की उत्तराधिकारी हैं। ऐसे में शंकराचार्य पद की वैधता पर सवाल उठाना अज्ञानता है। ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शंकराचार्य पद किसी आधुनिक संविधान की देन नहीं है, बल्कि यह पद संविधान से भी हजारों वर्ष प्राचीन है। “आप यह नहीं कह सकते कि हमारा पद आपके संविधान से आया है। जब आपका संविधान पैदा भी नहीं हुआ था, तब से यह पद चला आ रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि शंकराचार्य का कार्य किसी को चुनाव जिताना या हराना नहीं है। “हमारा काम सनातन धर्मियों को सही शिक्षा देना है और गौमाता की हत्या जैसे महापाप से समाज को बचाना है। अगर कोई अपनी करनी से हारता या जीतता है, तो उसमें हमारा क्या दोष?” अग्निहोत्री से मुलाकात उन्होंने बताया- कल हमारे शयनकाल में अग्निहोत्री हमसे मिलने आए थे, लेकिन उस समय उनका मौन काल चल रहा था, इसलिए कोई संवाद नहीं हो पाया। उन्होंने अपनी बात रखी, हमने सुनी और उन्हें आशीर्वाद दिया। हमारे मठ के पंडितों ने उन्हें सम्मानित किया, तिलक लगाया और उनके लक्ष्य में सफलता की कामना की।” एससी-एसटी एक्ट को लेकर अग्निहोत्री आंदोलन करने की बात कह रहे थे। लेकिन मैं मौन होने के कारण उनसे अधिक सवाल नहीं पूछ सके। लेकिन एक बात उन्होंने जरूर रेखांकित की कि “त्यागपत्र दिया गया था और वह वापस हो चुका है। आदमी थूक कर चाट चुका है।” आगे की रणनीति : संतों से संवाद आगे की रणनीति पर शंकराचार्य ने कहा कि जनता से हमारा संवाद लगातार जारी है और अब हम देशभर के संतों को एक पत्र लिखने जा रहे हैं। इस पत्र के माध्यम से संतों से पूछा जाएगा कि उनकी सनातन यात्रा सही दिशा में है या कहीं वे भटक तो नहीं रहे। हम संतों को यह भी बताएंगे कि हमने मुख्यमंत्री जी से क्या कहा है और वही बात आप सबसे भी कह रहे हैं — मांस के व्यापारियों से दूरी बनाइए। केवल गेरूवा वस्त्र देखकर किसी पर भरोसा मत कीजिए। आचरण देखिए।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, दूध देखो तो उसकी धार भी देखो, तेल देखो तो उसकी धार भी देखो। केवल रंग देखकर किसी को अपना मत मानिए।” महाकुंभ से हटाए गए शिवलिंग का क्या होगा? महाकुंभ में स्थापित शिवलिंग हटाए जाने के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि जब शिविर ही नहीं रहेगा तो शिवलिंग वहां क्यों रहेंगे। उन्होंने जानकारी दी कि ये शिवलिंग अब उस मंदिर में स्थापित किए जाएंगे, जहां सवा लाख शिवलिंगों की प्रतिष्ठा होनी है। यह मंदिर छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले, शिवगंगा नदी के किनारे, सपाद लक्षेश्वर धाम (सलधा) में बन रहा है। महाशिवरात्रि के अवसर पर वहां शिवलिंगों की प्रतिष्ठा शुरू की जाएगी। शंकराचार्य की बड़ी बातें पढ़िए- 1- लखनऊ में जुटेंगे संत, तय करेंगे कौन असली हिंदू शंकराचार्य ने कहा था- 10-11 मार्च को लखनऊ में सभी संत-महंत और आचार्य एकत्र हों। वहां यह तय किया जाएगा कि कौन हिंदू है, कौन हिंदू हृदय सम्राट है और किसे छद्म हिंदू या नकली हिंदू घोषित किया जाना चाहिए। 2- अब नकली हिंदुओं का पर्दाफाश करेंगे अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था- अब नकली हिंदुओं का पर्दाफाश किया जाना है। जितने भी हिंदू हैं, उनके साथ बहुत बड़ा छल हो रहा है। यह छल खुद को साधु, योगी, संत और भगवाधारी कहने वाले व्यक्ति और उसकी पार्टी द्वारा किया जा रहा। 3- मेला छोड़ने पर कहा- प्रशासन लालच दे रहा था, हमने नकारा माघ मेला छोड़ने पर शंकराचार्य ने कहा था- माफी मांगने का भी एक तरीका होता है, क्षमा याचना करनी पड़ती है। प्रशासन हमें लालच दे रहा था कि आप ऐसे नहा लीजिए, आपके ऊपर फूल बरसा देंगे। अगले साल के लिए चारों शंकराचार्यों के लिए प्रोटोकॉल बना देंगे, लेकिन हमने नकार दिया। हमने कहा कि जिन संन्यासियों पर आपने लाठी बरसाई, उनसे माफी मांगिए। अगर वे क्षमा कर दें, तो ठीक, लेकिन इस सब के लिए प्रशासन आगे नहीं आया। 4- इतिहास में पहली बार शंकराचार्य से प्रमाण मांगा गया अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था- अगले साल माघ मेले में मौनी अमावस्या पर संगम स्नान करेंगे। इतिहास में पहली बार किसी शासक ने किसी शंकराचार्य से प्रमाण मांगा। विश्व में आपके यहां का गोमांस बिक रहा है। इसे 40 दिन में रोककर दिखाइए, तभी हम मानेंगे कि आप हिंदू हैं। अगर 40 दिन बीत गए और यह नहीं हुआ, तो हम लखनऊ आएंगे। वहां संत-महंतों के साथ बैठकर निंदा करेंगे। …………….. ये खबर भी पढ़ें… अविमुक्तेश्वरानंद बोले-योगीजी गाय को राज्य माता बनाएं, आपको PM बनवाएंगे:गोमांस बैन करें; वरना धड़कनें बढ़ाने वाला ऐलान करेंगे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री बनने के लिए सपोर्ट देने का ऑफर दिया। उन्होंने शनिवार को कहा कि अगर योगी खुद को सच्चा हिंदू साबित करना चाहते हैं तो गाय को राज्य माता घोषित करें और गोमांस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाएं। योगी को हमने 40 दिन का समय दिया है। पढ़िए पूरी खबर
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