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ललितपुर में बन रहा प्रदेश का पहला बल्ड्रग फार्मा पार्क:1560 करोड़ से निर्माण जारी, 5 कंपनियों को आवंटित किए जा चुके प्लाट

ललितपुर जिले के ग्राम सैदपुर में 1475 एकड़ भूमि पर बल्क ड्रग फार्मा पार्क का निर्माण करीब 1560 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा है। यह प्रदेश का पहला फार्मा पार्क होगा। अब तक पांच कंपनियों को प्लॉट आवंटित किए जा चुके हैं, जबकि एक कंपनी आवंटन प्रक्रिया में है। प्रथम चरण में कुल 29 प्लॉट आवंटित होने हैं, जिससे देश की प्रमुख दवा कंपनियां यहां अपनी इकाइयां स्थापित करेंगी। मुख्यमंत्री ने हाल ही में प्रदेश मुख्यालय से अपने उद्बोधन में ललितपुर में स्थापित हो रहे इस फार्मा पार्क की चर्चा की। उन्होंने कहा कि ललितपुर प्राकृतिक दृश्यों और संसाधनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण जनपद है। सरकार ने प्रदेश के पहले फार्मा पार्क के लिए यहां भूमि अधिग्रहित की है और अब आवंटन की कार्रवाई तेजी से की जा रही है। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि इस फार्मा पार्क से युवाओं सहित हर वर्ग को रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि यहां के युवाओं को काम की तलाश में ललितपुर नहीं छोड़ना पड़ेगा। यह बल्क ड्रग फार्मा पार्क प्रदेश की पहचान बनेगा। प्रथम चरण में 350 एकड़ भूमि पर पार्क विकसित किया जा रहा है, जिसमें शोध केंद्र और ड्राई पोर्ट शामिल हैं। हरियाणा और बेंगलुरु में हुए रोड शो से निवेशकों का रुझान ललितपुर की ओर बढ़ा है। इस चरण में 28 औद्योगिक इकाइयां लगाने के लिए प्लॉट काटे जा रहे हैं। चार चरणों में तैयार होने वाले इस फार्मा पार्क से करीब 14 हजार युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है। कुल 1475 एकड़ भूमि पर बनने वाले इस पार्क की अनुमानित लागत 1560 करोड़ रुपये है, जिसमें से सरकार ने प्रथम किस्त के रूप में 450 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। फार्मा कंपनियों का निवेश 12 हजार करोड़ हैं ,यहां प्रत्यक्ष रोजगार14 हजार लोगों को मिलेगा। सैदपुर निर्मित फार्मा पार्क के लिए 33/11 केवी उपकेंद्र की स्थापना का कार्य चल रहा है। फार्मा पार्क में श्रमिक सुविधा केंद्र की स्थापना की गई है। इसमें कंपनियों में काम करने वाले मजदूर विश्राम कर सकेंगे। बल्क ड्रग पार्क में रिसर्च सेंटर के लिए यूपी सरकार ने काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) और डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) जैसी नामी संस्थाओं को अपना नॉलेज पार्टनर बनाया है। यहां नए उपकरण भी तैयार किए जा सकेंगे, जिससे गंभीर बीमारियों को जल्द चिह्नित किया जा सके। प्रदेश सरकार ने सीएसआईआर की 43 और डीआरडीओ की 46 प्रयोगशाला से एमओयू साइन किए हैं। यहां सस्ती दवाओं के लिए शोध का कार्य होगा।


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