ललितपुर स्थित कचहरी परिसर में शनिवार को भारत की प्रथम महिला शिक्षिका और समाज सुधारिका सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाई गई। यह समारोह अधिवक्ता हरदयाल लोधी की अध्यक्षता में आयोजित किया गया, जहां उपस्थित अधिवक्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। समारोह को संबोधित करते हुए अध्यक्ष हरदयाल लोधी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले केवल एक शिक्षिका नहीं, बल्कि नारी सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय की मशाल थीं। उन्होंने उस दौर में महिलाओं की शिक्षा के लिए संघर्ष किया, जब सामाजिक बेड़ियाँ बहुत मजबूत थीं। लोधी ने कहा कि उनके द्वारा जलाई गई शिक्षा की ज्योति का ही परिणाम है कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। अधिवक्ता जानकी बौद्ध ने सावित्रीबाई फुले के संघर्षों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने अपमान और बाधाओं को सहते हुए भी समाज के वंचित वर्गों के लिए पाठशालाएं खोलीं। उन्होंने जोर दिया कि उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने 19वीं सदी में थे। अधिवक्ता शशिकांत लोधी ने युवाओं से सावित्रीबाई फुले के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित समाज ही एक मजबूत राष्ट्र की नींव रख सकता है और सावित्रीबाई फुले का जीवन हमें निःस्वार्थ सेवा की प्रेरणा देता है। इस कार्यक्रम में अधिवक्ता महेंद्र कुमार पाराशर, पुष्पेंद्र सिंह चौहान, शशिकांत सिंह लोधी, जानकी प्रसाद बौद्ध, विजयनारायण गोस्वामी, कमलेश लोधी, दीपक सिंह राजपूत, हरगोविंद, शेर सिंह यादव, अरुणप्रताप सिंह लोधी, शैलेंद्र सिंह लोधी, विकास झा, आकाश झा और अनुराग लोधी सहित अनेक अधिवक्ता मौजूद रहे।
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