इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पटरी दुकानदारों को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। न्यायालय ने कहा है कि जब तक टाउन वेंडिंग कमेटी शहर का सर्वेक्षण पूरा नहीं कर लेती और स्ट्रीट वेंडिंग सर्टिफिकेट जारी नहीं कर देती, तब तक किसी भी मौजूदा पटरी दुकान को हटाया नहीं जाएगा। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस आदेश का लाभ उन पटरी दुकानदारों को नहीं मिलेगा, जो यातायात में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। ऐसे दुकानदारों पर यह आदेश लागू नहीं होगा। न्यायालय ने नगर निगम, लखनऊ को वेंडिंग प्लान बनाने का भी आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई तीन माह बाद निर्धारित की गई है। अमीनाबाद के पटरी दुकानदारों ने दायर की थी याचिका यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति एके कुमार चौधरी की खंडपीठ ने अमीनाबाद के पटरी दुकानदारों अमर कुमार सोनकर व अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर पारित किया। न्यायालय ने कहा कि जब तक विधि अनुसार सर्वेक्षण पूरा नहीं हो जाता, राज्य सरकार द्वारा वेंडिंग योजना को स्वीकृति नहीं मिल जाती तथा सभी पात्र पटरी दुकानदारों को वेंडिंग प्रमाणपत्र जारी नहीं हो जाते, तब तक धारा 3(3) के तहत ऐसे दुकानदारों को वैधानिक संरक्षण प्राप्त रहेगा। याचियों का कहना था कि सर्वेक्षण पूरा हो गया है लेकिन अब तक सर्टिफिकेट जारी नहीं किए गए हैं। वहीं, नगर निगम ने स्वीकार किया कि वेंडिंग प्लान तैयार तो किया गया है, लेकिन उसे राज्य सरकार की स्वीकृति नहीं मिली है। इस पर न्यायालय ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार की मंजूरी के बिना वेंडिंग प्लान कानून की नजर में अस्तित्वहीन है। न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014 के तहत आवश्यक योजना, सर्वेक्षण और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पिछले 11 वर्षों से लंबित है।
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