लखनऊ में अकीदत के साथ शबे बरात मनाया गया। शहर के विभिन्न कब्रिस्तानों में भारी भीड़ देखी गई। शबे बरात की मुकद्दस रात को लोगों ने अपने पूर्वजों को याद करने और इबादत में गुजारी । माफी की रात कही जाने वाली शबे बरात पर शहर की कब्रिस्तानों में रात भर दुआओं और फातिहा ( पूर्वजों की कब्र के सामने कुरआन पढ़ना ) पढ़ने का सिलसिला जारी रहा। मस्जिदों और इमामबाड़ों में लोगों ने नमाजे अदा किया और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हुए। कब्रिस्तानों में लगी भीड़ ऐशबाग स्थित कब्रिस्तान , मॉल एवेन्यू स्थित दरगाह दादा मियां कब्रिस्तान और तालकटोरा कर्बला में शाम ढलते ही परिवारजन की भीड़ उमड़ पड़ी । लोग अपने पूर्वजों की कब्रों पर सफेद चादर चढ़ाकर, फूल बिछाकर, अगरबत्ती जलाकर और रोशनी सजाकर दुआएं मांगते रहे। पेपर मिल कब्रिस्तान, फातिमी कब्रिस्तान, कदीमी कब्रिस्तान समेत अन्य कब्रिस्तानों में यही दृश्य देखने को मिला। परिवार के लोगों ने अपने पूर्वजों के नाम पर भोजन और कपड़े भी दान किए। मान्यताओं वाली रात मस्जिदों में रात भर इबादत हुई। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। ऐशबाग ईदगाह स्थित इस्लामिक सेन्टर आफ इण्डिया की ओर से जलसा (धार्मिक कार्यक्रम) का आयोजन हुआ। जिसकी अध्यक्षता मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने की। मौलाना खालिद ने कहा कि शबे बरात बहुत मुबारक और मान्यताओं वाली रात है। इस रात में इंसान को खुदा की तरफ से उम्र, रोजी, सेहत और जिन्दगी निर्धारित की जाती है। सभी लोगों को इस रात में ज्यादा से ज्यादा कुरआन , नमाज पढ़ना चाहिए । इबादत के साथ जरूरतमंदों की मदद करना चाहिए। ऐसी मुबारक रात को अनावश्य कामों में बर्बाद नहीं करना चाहिए।
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