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लखनऊ में UGC के समर्थन में बापसा का धरना:संगठन का आरोप- आरक्षण, नियुक्तियों और NFS के नाम पर भेदभाव जारी

लखनऊ में बिरसा आंबेडकर फुले छात्र संगठन (बापसा) के बैनर तले छात्र पिछले 72 घंटों से लखनऊ के परिवर्तन चौक पर डटे हुए हैं। प्रदर्शन का कारण विश्वविद्यालय अनुदान आयोग गाइडलाइंस 2026 है, जिसे लागू करने और उसमें आवश्यक संशोधन की मांग की जा रही है। संगठन का कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, धरना समाप्त नहीं होगा। UGC गाइडलाइंस 2026 लागू करने और संशोधन की मांग लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र अमितेश पाल ने बताया कि यह अनिश्चितकालीन धरना है। उनकी मांग है कि UGC गाइडलाइंस 2026 को तुरंत लागू किया जाए और “Not Found Suitable (NFS)” का सहारा लेकर की जा रही नियुक्तियों की पहले जांच हो। उनका कहना है कि NFS लगाने वाली समितियों की भूमिका की भी समीक्षा जरूरी है। NFS के दुरुपयोग और प्रतिनिधित्व पर सवाल छात्र संगठन का आरोप है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में OBC, SC और ST वर्गों के साथ भेदभाव की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। खासकर शिक्षक नियुक्तियों में NFS जैसे प्रावधानों के दुरुपयोग से आरक्षित वर्गों का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो रहा है। पुलिस दबाव का आरोप, धरना जारी रखने का ऐलान बापसा के उपाध्यक्ष आकाश कठेरिया ने आरोप लगाया कि रात के समय पुलिस मोबाइल फोन ले लेती है, प्रदर्शनकारियों को जगा कर परेशान किया जाता है। बावजूद इसके, संगठन के छात्रों का कहना है कि वे पीछे नहीं हटेंगे और मांगें पूरी होने तक धरना जारी रहेगा। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में OBC प्रोफेसर नहीं होने का दावा प्रदर्शन के दौरान लगाए गए पोस्टरों में दावा किया गया कि जनवरी 2020 तक किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय में एक भी OBC प्रोफेसर नियुक्त नहीं हुआ। संगठन ने इसे सामाजिक समानता के संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए UGC और केंद्र सरकार से जवाब मांगा। भेदभाव के मामलों में बढ़ोतरी का आरोप छात्र संगठन का कहना है कि देशभर में OBC, SC और ST वर्गों के खिलाफ जातिगत भेदभाव के मामलों में करीब 118 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। साथ ही विश्वविद्यालयों में महिलाओं और आरक्षित वर्गों की शीर्ष पदों पर भागीदारी बेहद कम बताई गई।


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