लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में ABVP-NSUI स्टूडेंट्स के बीच बवाल हो गया। देखते ही देखते दोनों गुटों के बीच तीखी नोकझोंक और हाथापाई शुरू हो गई। पुलिस ने बीच-बचाव करने की कोशिश की तो उनके साथ भी धक्का-मुक्की हुई। एनएसयूआई से जुड़े छात्रों ने प्रॉक्टर का घेराव किया। बोले- विश्वविद्यालय प्रशासन एबीवीपी को किसी भी कार्यक्रम के लिए आसानी से परमिशन देता है, जबकि एनएसयूआई से भेदभाव करता है। दरअसल, ABVP ने समाज कार्य विभाग में ‘पंच परिवर्तन-राष्ट्रपुर्निमाण की दशा’ विषय पर राष्ट्रीय गोष्ठी का आयोजन किया था। NSUI संगठन से जुड़े छात्रों ने इसका विरोध किया और कार्यक्रम रुकवाने पहुंचे थे। इस दौरान दोनों गुट के छात्र आमने-सामने आ गए। आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ जो हिंसक झड़प में बदल गया। स्थिति बिगड़ती देख विश्वविद्यालय प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की। 3 तस्वीरें देखिए… विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं देता परमिशन NSUI से जुड़े स्टूडेंट्स का कहना था कि LU कैंपस में छात्रों के मुद्दों पर दिल्ली विश्वविद्यालय से NSUI के दो छात्र संघ पदाधिकारी संवाद के लिए आए थे, लेकिन दोनों ही बार प्रशासन ने न हॉल दिया, न खुले में कार्यक्रम करने की अनुमति दी। अगर NSUI का कार्यक्रम नहीं होगा, तो ABVP का कार्यक्रम भी नहीं होने देंगे।
कार्यक्रम को लेकर NSUI ने उठाए सवाल NSUI के छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय परिसर में ABVP ने जिस राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। उसे प्रॉक्टोरियल बोर्ड के संरक्षण में कराया जा रहा था। नियम-कानूनों को नजरअंदाज कर बाहरी लोगों को परिसर में प्रवेश देने से छात्रों में नाराजगी बढ़ गई। इसी मुद्दे को लेकर छात्र प्रशासन से सवाल-जवाब करने पहुंचे थे। पहले प्रॉक्टर से बहस, फिर बढ़ा विवाद कार्यक्रम में बाहरी लोगों की मौजूदगी पर सबसे पहले छात्रों की प्रॉक्टर से बहस हुई। माहौल गर्म होता चला गया और कार्यक्रम में मौजूद ABVP के लोग भी आमने-सामने आ गए। इसके बाद ही छात्र संगठनों के बीच टकराव की स्थिति बनी। प्रोफेसर पर हमले से भड़का आक्रोश NSUI के प्रिंश और आकाश ने आरोप लगाया कि संगोष्ठी में शामिल होने आए बाहरी लोगों ने प्रॉक्टोरियल बोर्ड के एक प्रोफेसर से धक्का-मुक्की की। प्रोफेसर को अपनी जान बचाने के लिए पुलिस के पास भागना पड़ा। प्रशासन ने संभाली स्थिति घटना की सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन मौके पर पहुंचा और हालात को काबू में किया। लखनऊ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पूरे मामले की जांच का भरोसा दिलाया है। चीफ प्रॉक्टर राकेश द्विवेदी ने बताया- कैंपस का माहौल किसी भी सूरत में बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। नियम विरुद्ध कोई भी आयोजन कैंपस में नहीं होगा। दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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