लखनऊ के राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज में सोमवार को ‘पठन संस्कृति उत्सव’ का आयोजन किया गया। इस उत्सव ने विद्यालय परिसर को शिक्षा, साहित्य और कला के केंद्र में बदल दिया। यह आयोजन उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा विभाग और नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली के सहयोग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों में पठन, चिंतन तथा रचनात्मकता की संस्कृति को बढ़ावा देना था। अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा के मार्गदर्शन में यह उत्सव आयोजित हुआ। उन्होंने पठन संस्कृति को शिक्षा की आत्मा बताते हुए इसे केवल एक औपचारिक आयोजन के बजाय विचार और संवाद के उत्सव के रूप में प्रस्तुत किया। पठन संस्कृति एक सतत प्रक्रिया है पार्थ सारथी सेन शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उनका तथा उपस्थित रचनाकारों, लेखकों और साहित्यकारों का सम्मान किया गया। पुस्तकालय प्रकोष्ठ की विशेष कार्याधिकारी सांत्वना तिवारी ने कहा कि पठन संस्कृति एक सतत प्रक्रिया है, जिसे विद्यालय, शिक्षक और पुस्तकालय मिलकर ही सकारात्मक रूप दे सकते हैं। संयुक्त शिक्षा निदेशक प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि पुस्तकें विद्यार्थियों को कक्षा की सीमाओं से परे व्यापक ज्ञान से जोड़ती हैं। उप शिक्षा निदेशक रेखा दिवाकर ने पठन को व्यक्तित्व विकास की आधारशिला बताया। जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि विद्यालय को पुस्तक, कला और संवाद का केंद्र बनना चाहिए। विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया उत्सव के प्रथम सत्र में पार्थ सारथी सेन शर्मा ने पठन संस्कृति और वर्तमान शिक्षा सुधारों पर अपने विचार साझा किए।द्वितीय सत्र में राष्ट्रीय कला उत्सव और स्कूल बैंड प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान वायलिन वादन, कथक और लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां हुईं। कथावाचक हिमांशु बाजपेई और वैष्णवी की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में भावनात्मक गहराई जोड़ी। मीडिया कोऑर्डिनेटर दिनेश कुमार ने बताया कि यह उत्सव इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि पुस्तकें समाज की चेतना और विवेक का आधार हैं।
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