गोमती नदी में वाटर मेट्रो चलाने की दिशा में सरकार ने रफ्तार बढ़ा दी है। परिवहन राज्य मंत्री दयाशंकर सिंह के सरकारी आवास 9, कालीदास मार्ग पर इस संबंध में एक अहम बैठक हुई। बैठक में कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड के निदेशक संजय कुमार मौजूद रहे। तकनीकी रिपोर्ट पेश, गोमती में संभावनाओं पर मंथन बैठक में लखनऊ की गोमती नदी में वाटर मेट्रो चलाने की तकनीकी व्यवहारिकता पर चर्चा हुई। कोच्चि मेट्रो के निदेशक ने इस संबंध में तैयार की गई स्टडी रिपोर्ट मंत्री के सामने रखी। रिपोर्ट में बताया गया कि गोमती में जल परिवहन की संभावनाएं मौजूद हैं और सही योजना के साथ इसे सफलतापूर्वक शुरू किया जा सकता है। यूपी के कई शहरों तक पहुंचेगा जल परिवहन परिवहन मंत्री ने बताया कि प्रदेश के तीन महत्वपूर्ण स्थानों की तकनीकी व्यवहारिकता रिपोर्ट पहले ही तैयार हो चुकी है। लखनऊ में गोमती नदी के बाद मथुरा में यमुना नदी (आगरा से मथुरा तक), गोरखपुर के रामगढ़ ताल, बलिया के सुरहा ताल और गंगा नदी में भी वाटर मेट्रो और जल परिवहन को आगे बढ़ाने की योजना है। उनका कहना था कि इससे न सिर्फ लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। पहले स्टडी, फिर डीपीआर और टेंडर मंत्री ने बताया कि परियोजना के तहत सबसे पहले नेविगेशनल एड्स लगाए जाएंगे। इसके बाद इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, पैसेंजर काउंटिंग सिस्टम, पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव अध्ययन, टर्मिनल और जेट्टी निर्माण, रोड कनेक्टिविटी, पॉन्टून, ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम, इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, बोट चार्जिंग, फायर प्रोटेक्शन और एचवीएसी जैसे बिंदुओं का अध्ययन किया जाएगा। इन सभी पहलुओं के आधार पर डीपीआर तैयार होगी, फिर लागत तय कर अलग-अलग कार्यों के लिए निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी। अधिकारियों को साफ निर्देश परिवहन मंत्री ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि मुख्यमंत्री के इस ड्रीम प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी औपचारिकताओं में तेजी लाई जाए। साथ ही परियोजना पर आने वाले खर्च का पूरा ब्यौरा जल्द उपलब्ध कराया जाए, ताकि समय पर बजट आवंटन हो सके। उन्होंने कहा कि वाटर मेट्रो से लखनऊ को एक नई पहचान मिलेगी और आम लोगों को सफर के साथ-साथ मनोरंजन का भी नया विकल्प मिलेगा।
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