प्रयागराज माघ मेला और कुंभ मेले के प्रमुख आकर्षण माने जाने वाले शिव योगी अभय चैतन्य ब्रह्मचारी मौनी महाराज, जिन्हें “रुद्राक्ष वाले बाबा” के नाम से भी जाना जाता है, ने इस वर्ष मेला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने प्रयागराज मेला प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए संगम लोअर मार्ग पर जूना अखाड़े के एक संत के शिविर में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। मौनी महाराज ने बताया कि वे 1984 से निरंतर माघ मेले और कुंभ में आकर शिविर लगाकर अनुष्ठान करते रहे हैं। कड़ाके की ठंड में भी वे शिविर से संगम तट तक चक्रवर्ती दंडवत परिक्रमा (लोटकर) करते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार भी वे विशेष अनुष्ठान और यज्ञ करने आए हैं।पहले उनके अनुष्ठान राम जन्मभूमि मुक्ति और भव्य मंदिर निर्माण की सफलता के लिए होते थे। अब वे काशी और मथुरा के लिए संकल्पित अनुष्ठान कर रहे हैं।उनका आरोप है कि 16 नवंबर 2025 को मेला प्राधिकरण को शिविर की जमीन और सुविधाओं के लिए आवेदन दिया गया था, लेकिन उन्हें अभी तक उपयुक्त स्थान आवंटित नहीं किया गया है। मौनी महाराज ने कहा कि प्रशासन द्वारा दी गई जमीन शिविर लगाने योग्य नहीं है और काफी दूर भी है। उन्होंने बताया कि 31 दिसंबर को जब वे मेला क्षेत्र पहुंचे और मेलाधिकारी से मिलने का प्रयास किया, तो कार्यालय के बाहर बैरिकेडिंग लगाकर पुलिस बल तैनात कर दिया गया। उन्हें मेलाधिकारी से मिलने नहीं दिया गया। मौनी महाराज ने इस स्थिति को “अपमानजनक” बताते हुए धरना शुरू करने को अपनी मजबूरी बताया।मौनी महाराज ने इस वर्ष माघ मेले में 5 करोड़ 51 लाख रुद्राक्ष का शिवलिंग निर्माण करने का संकल्प लिया था। इसके साथ ही, 12 करोड़ 51 लाख महामंत्रों के जप की पूर्णाहुति के बाद आतंकवाद विनाश हेतु 101 कुंतल की महाआहुति संपन्न करने का भी उनका संकल्प था। इसके अलावा, काशी-मथुरा निर्माण हेतु 1644वीं चक्रवर्ती दंडवत परिक्रमा भी होनी थी।उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 3 जनवरी पौष पूर्णिमा तक मेला प्रशासन से कोई समाधान नहीं मिला, तो वे मेला छोड़कर दिल्ली जाएंगे। वहां वे प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर संत समाज के साथ आमरण अनशन शुरू करेंगे।
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