वाराणसी में एंटीकरप्शन की छापेमारी में काशी विद्यापीठ से गिरफ्तार रिश्वतखोर दरोगा की गिरफ्तारी के बाद उससे मिलने पहुंचे दरोगा और इंस्पेक्टर भी अब जांच की रडार पर है। जिला कोर्ट के अधिवक्ता ने आईजीआरएस पर अपील दायर की है, वहीं पुलिस कमिश्नर से सभी दरोगाओं की भूमिका और उनके साथ रिश्वतखोर दरोगा के संंबंधों की जांच कराने की मांग की है। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि लालपुर पाण्डेपुर थाने पर 2019 बैच के दरोगा शिवाकर मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद दरोगाओं की एक टीम ने अराजकता दिखाई। अभियुक्तों को छुड़ाने हेतु अवैध गिरोह बनाकर हंगामा किया। एंटी करप्शन की टीम पर दबाव बनाकर उन्हें गलत साबित करते रहे। इन सभी के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की है। वाराणसी के जैतपुरा निवासी अधिवक्ता दिनेश कुमार दीक्षित ने बताया कि वे भारत के विधि विधान व कानून पर विश्वास रखते हैं और भ्रष्टाचार निवारण संगठन वाराणसी इकाई की टीम की कार्रवाई को सही मानते हैं। इस कार्रवाई के दौरान 2019 बैच का दरोगा शिवाकर मिश्रा और सिपाही गौरव द्विवेदी 20 हजार रूपये रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा गया था। दरोगा शिवाकर मिश्रा की गिरफ्तारी उसके तैनाती स्थल काशी विद्यापीठ चौकी से हुई थी, सिपाही को गिरफ्तार किया गया था। इसकी सूचना पर 2019 बैच के दरोगा ने वॉट्सएप ग्रुप के माध्यम से साथियों को बुलाया और थाना परिसर में इकट्ठा कर लिया। पहले कई पुलिसकर्मी षड्यंत्र और संकलित होकर सर्वप्रथम महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ पुलिस चौकी के पास एकत्रित हुए और गिरफ्तार करने वाली भ्रष्टाचार निवारण संगठन वाराणसी इकाई की टीम से बाद-विवाद करने लगे। गिरफ्तार को छुड़ाने के लिए हंगामा किया और विश्वविद्यालय कैंपस में अराजकता का माहौल कायम कर दिया। पूरी घटना विश्वविद्यालय के CCTV फुटेज में दर्ज है और किसी तरह भ्रष्टाचार निवारण संगठन इकाई गिरफ्तार अभियुक्तों को लेकर थाना- लालपुर (वाराणसी कमिश्नरेट) पहुंची। लालपुर थाने में भी हंगामा काटा अधिवक्ता ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी का पीछा करते हुए 2019 बैच के 20-25 की संख्या में दरोगा थाना लालपुर-पांडेयपुर पहुंच गए और वहा भ्रष्टाचार निवारण संगठन वाराणसी ईकाई की टीम को घेराव किया। टीम के इंस्पेक्टर समेत अन्य से अभद्रता की और गाली देते हुए अभियुक्तगण को छुड़ाने का दबाव बनाया। सफाइ देने पर इंस्पेक्टर और टीम से मारपीट पर आमादा हो गये, जिसके कारण लालपुर-पांडेयपुर थाने में अराजकता और स्थिती तनावपूर्ण हो गई। इसके साक्ष्य सोशल मीडिया और थाने के कैमरे में मिल जाएंगे। उन्होंने जांच कराकर FIR दर्ज कराने और CCTV के आधार पर अभियुक्तों की पहचान कर उन्हें दंडित करने की अपील की।
सीएम की मंशा बताई अधिवक्ता ने कहा कि कानून की रक्षा का दारोमदार जिन कंधों पर है रक्षक कानून के भक्षक बन गये। माननीय मुख्यमंत्री की वह भावना जो है कि “कानून का उल्लंघन किसी को किसी किमत पर नहीं करने दिया जायेगा” के लिए भी चुनौती बने। पुलिस बल अनुशासन से चलता है व अनुशासनहीनता पुलिस के सम्मान के लिए घातक है; 2019 बैच के अज्ञात दरोगा ने अभियुक्तों को छुड़ाने हेतु एक अवैध गिरोह का निर्माण कर उपरोक्त कृत्य किया जो BNS के प्रावधानों के अनुसार दंडनीय है।
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