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रायबरेली से लखनऊ में ट्रांसफर हुआ राहुल गांधी का केस:हाई कोर्ट आदेश के बाद 6 जनवरी को होगी ब्रिटिश नागरिकता मामले की सुनवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश पर रायबरेली से स्थानांतरित राहुल गांधी से जुड़े आपराधिक मामले की सुनवाई सोमवार को लखनऊ स्थित विशेष सांसद-विधायक (MP-MLA) कोर्ट में शुरू हुई। यह मामला अब क्रिमिनल मिस्क केस संख्या 31/2026 के रूप में दर्ज है। याचिकाकर्ता और वादी एस. विग्नेश शिशिर ने स्वयं अदालत में करीब दो घंटे तक दलीलें पेश कीं। कोर्ट ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए 6 जनवरी 2026 की तारीख तय की है। हाईकोर्ट के आदेश पर रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर यह आपराधिक मामला पहले रायबरेली स्थित विशेष MP-MLA कोर्ट में लंबित था। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश के बाद इसे रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित किया गया। स्थानांतरण के बाद मामले को नए सिरे से क्रमांकित कर क्रिमिनल मिस्क केस संख्या 31/2026 बनाया गया है। दो घंटे तक चली याचिकाकर्ता की दलील सोमवार को विशेष MP-MLA कोर्ट लखनऊ में सुनवाई की शुरुआत हुई, जिसमें याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने स्वयं अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। उन्होंने करीब दो घंटे तक मामले से जुड़े तथ्यों और आरोपों को कोर्ट के सामने रखा। इसके बाद अदालत ने सुनवाई को आगे बढ़ाने के लिए अगली तारीख तय कर दी। एफआईआर दर्ज कराने की मांग याचिका में अदालत से यह मांग की गई है कि राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। याचिकाकर्ता ने भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के साथ-साथ पासपोर्ट अधिनियम, विदेशी अधिनियम और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत गंभीर अपराध किए जाने का आरोप लगाया है। याचिका में पासपोर्ट एक्ट 1967, ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट 1923 और फॉरेनर्स एक्ट 1946 की धाराओं का भी उल्लेख किया गया है। कथित ब्रिटिश नागरिकता को लेकर विवाद एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर इस याचिका का मुख्य आधार राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता बताया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि इस मुद्दे से जुड़े तथ्यों की आपराधिक जांच आवश्यक है और इसी आधार पर एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। कोर्ट परिसर में हंगामे का आरोप याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि 3 नवंबर 2025 और 5 दिसंबर 2025 को रायबरेली स्थित विशेष MP-MLA कोर्ट में सुनवाई के दौरान भारी हंगामा हुआ था। विग्नेश शिशिर का दावा है कि 200 से अधिक वकीलों और कांग्रेस समर्थकों ने कोर्ट हॉल में घुसकर नारेबाजी की और न्यायिक कार्यवाही को बाधित किया। हालात इतने बिगड़ गए कि विशेष न्यायाधीश को कोर्ट कक्ष छोड़कर जाना पड़ा। पूर्व नियोजित हमले की साजिश का दावा याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि 12 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित सुनवाई से पहले उन पर पूर्व नियोजित हमला करने की साजिश रची गई थी। उनका कहना है कि खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर इस कथित साजिश को समय रहते टाल दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह साजिश कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा रची गई थी। भाजपा नेता हैं वादी इस मामले में वादी एस. विग्नेश शिशिर भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं। उनका कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि कानून, राष्ट्रीय हित और संवैधानिक प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है। इसी आधार पर उन्होंने कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। विशेष MP-MLA कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को निर्धारित की है। अब इस मामले में कोर्ट के अगले रुख और आदेश पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।


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