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राजा बुंदेला ने अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग तेज की:महोबा के खरेला से ‘गांव-गांव, पांव-पांव’ पदयात्रा का किया आगाज

महोबा में अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। बुंदेलखंड संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष और फिल्म अभिनेता राजा बुंदेला ने खरेला से ‘गांव-गांव, पांव-पांव’ पदयात्रा के चौथे चरण की शुरुआत की। श्रृंगी ऋषि की तपोभूमि से उन्होंने सवाल उठाया कि जब पंजाबियों को पंजाब मिल सकता है, तो बुंदेलखंडियों को बुंदेलखंड क्यों नहीं? बुंदेला ने आरोप लगाया कि आजादी के 75 साल बाद भी यह क्षेत्र बदहाली और पलायन का सामना कर रहा है। बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाने की दशकों पुरानी यह मांग अब गांव-गांव तक पहुंच रही है। बुंदेलखंड संयुक्त मोर्चा के बैनर तले राजा बुंदेला ने महोबा के खरेला स्थित श्रृंगी ऋषि आश्रम से पदयात्रा के चौथे चरण का शुभारंभ किया। इस दौरान सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में तिरंगा लिए और ‘बुंदेलखंड तो लेंगे-लेंगे’ के नारे लगाते हुए सड़कों पर निकले। खरेला के बाजारों में नुक्कड़ सभाओं को संबोधित करते हुए राजा बुंदेला ने सरकारों पर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि जब भाषाई और क्षेत्रीय आधार पर देश में बंगाल और पंजाब जैसे राज्य बन सकते हैं, तो बुंदेलखंड को उसका अधिकार क्यों नहीं दिया जा रहा? उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र करोड़ों का राजस्व देता है, फिर भी बुनियादी शिक्षा, चिकित्सा और सड़क जैसी सुविधाओं के लिए आज भी संघर्ष कर रहा है। राजा बुंदेला ने विकास के दावों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के लिए किसानों की जमीनें अधिग्रहित की गईं, लेकिन अब उन्हें ही टोल चुकाना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि डिफेंस कॉरिडोर जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में भी स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल रहा है। इसके परिणामस्वरूप, क्षेत्र का 68 प्रतिशत युवा दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में मजदूरी करने को विवश है। मोर्चा के अन्य पदाधिकारियों ने भी पृथक राज्य निर्माण के संभावित लाभ गिनाए। महासचिव कालूराम प्रजापति ने कहा कि अलग राज्य बनने पर यहां उत्पादित होने वाली 2500 मेगावाट बिजली सबसे पहले बुंदेलखंड के उद्योगों को मिलेगी, जिससे पलायन रुकेगा। दीपाली सिन्हा ने क्षेत्र के अस्पतालों के केवल ‘रेफरल सेंटर’ बनकर रह जाने पर चिंता व्यक्त की। यात्रा के दौरान खरेला नगर पंचायत अध्यक्ष संतोष सिंह ने प्रधानमंत्री के नाम एक समर्थन पत्र भी सौंपा। यह यात्रा ललितपुर, झांसी और हमीरपुर के बाद अब महोबा के गांव-गांव में अलख जगा रही है। राजा बुंदेला ने 11 तारीख को महोबा में यात्रा के समापन और इसके बाद दिल्ली में बड़े आंदोलन का ऐलान किया है।


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