‘लखनऊ का नाम पहले लखपूरी था, मुगल आए तो लखनऊ कर दिए। इधर बाबा भी आए हैं, बाबा ने फैज़ाबाद से मुक्ति दिला दी, इलाहाबाद से मुक्ति दिला दी, मुगलसराय से मुक्ति दिला दी। बहुत जल्द हमारे आदरणीय योगी बाबा लखनऊ से भी मुक्ति दिलाएंगे, चिंता मत करिए’। ये बातें कथावाचक राजन जी ने गोरखपुर में कथा के दौरान कही मंच से कही, उन्होंने गोरखपुर को लेकर भी कहा कि- ‘मैं कल रात गोरखपुर की सड़कों पर घूमने निकला था। मैं अपने हृदय की बात को बता रहा हूँ। गोरखपुर वासियों को, गोरखपुर में रहने वाले लोगों को उठते- बैठते, सोते-जगते, दिन-रात, उत्तर प्रदेश यसस्वी मुख्यमंत्री परम पूज्य महाराज जी को दिन-रात धन्यवाद देना चाहिये। गोरखपुर का जो विकास हुआ है मेरे कल्पना के बाहर था, मैं सोच भी नहीं सकता था कि हमारा गोरखपुर ऐसा दिखेगा इतनी चौड़ी सड़कें, इतने ओवरब्रिज, इतना स्वच्छता वो हैं तभी ये हो पाया ’। हम सभी को योगी जी को धन्यवाद देना चाहिए। गोरखपुर के चम्पा देवी पार्क में नौ दिवसीय श्रीराम तथा का आयोजन 27 जनवरी से शुरू हुआ था। जिसका समापन 4 फरवरी को बड़े श्रद्धाभाव के साथ हुआ। कथा के दौरान लाखों भक्त कथा का रसपान किए। कथा के शुरुआती दिनों में आयोजक पक्ष से कोई राजन जी की टीम को गोली मारने तक धमकी दे दी थी। इस बात खुलासा राजन जी ने अपनी कथा के अगले ही दिन मंच से की थी। अब सिलसिलेवार तरीके से पूरा मामला समझ लीजिए… कथा के तीसरे दिन यानी 29 जनवरी को आयोजकों का एक पक्ष किसी बात को लेकर कथावाचक की टीम के साथ भिड़ गया। बात इतनी बढ़ गई कि दोनों कहासुनी होने लगी। इसी बीच किसी ने राजन जी महाराज की टीम को जान से मारने की धमकी दे डाली। प्रकरण का पता चलते ही राजन जी महाराज ने वापस जाने का मन बना लिया। मामले को गंभीरता से लेते हुए एक जनप्रतिनिधि ने उन्हें मनाया। दोबारा ऐसा न होने का आश्वासन दिया। तब जाकर राजन जी महाराज और टीम यहां रुकी। हमसे मिलवाने के लिए कोई 1100 रुपए ले रहा, सावधान हो जाएं राजन जी महाराज ने घटना का जिक्र अगले दिन यानी 28 जनवरी को अपनी कथा में किया। कहा- 16 साल की इस यात्रा में पहली बार ऐसी बातें सामने आईं हैं। हम बोलते नहीं हैं। हम प्रेम से घर में कथा सुनाने आए हैं तो उसी प्रेम से सुनिए। एक बात कहूं, सुनने में आया है कि हमसे मिलवाने के लिए कोई 1100 रुपए ले रहा है, ऐसे लोग सावधान हो जाएं। राजन जी महाराज ने कहा- हम स्पष्ट बताते हैं कि धरती के किसी भी कोने में, देश-विदेश में, कहीं भी हम पैसा लेकर नहीं मिलते। मिलने का समय निश्चित होता है। हर कथा में दोपहर में 1 घंटे मिलते हैं। श्री राम कथा आयोजन समिति करा रही थी कथा इस श्रीराम कथा का आयोजन श्री राम कथा आयोजन समिति संस्था द्वारा किया जा रहा था। कार्यक्रम के मुख्य आयोजकों में डॉ. कुमुद त्रिपाठी, मदन मोहन त्रिपाठी, विधायक प्रदीप शुक्ल, अशोक शुक्ल, भोलेंद्र दुबे सहित अन्य लोग शामिल थे। रामकथा आयोजन में क्या-कुछ हुआ, ये हमने मुख्य आयोजक अशोक शुक्ला से समझा। पढ़िए… सवाल. कथा के तीसरे दिन क्या मामला हुआ था, गोली मारने की धमकी भी दे दी गई?
जवाब. यह बाबा गोरखनाथ की धरती है। हमें इस बारे में जानकारी नहीं है। चूंकि यहां जनसैलाब आ रहा है और योगी आदित्यनाथ का शहर है, यहां किसी की भी हैसियत नहीं है कि इस तरह की बात करे। घटना वाले दिन राजनजी की टीम से किसी ने पुष्पदत्त जैन की भाभी को मंच से धक्का दे दिया। इसी बात को लेकर विरोध हुआ है, तमाम लोग यहां इकट्ठा थे। इसके जवाब में इधर से भी कोई कुछ कहा होगा, मैंने वो सुना नहीं कि गोली चल जाएगी। मैं उस वक्त मंच पर था। अगर कोई पागल लड़का कहा होगा, तो राजन जी को मंच से यह बात नहीं करनी चाहिए थी, यह उचित नहीं था। वह एक व्यास पीठ पर बैठे हुए हैं, इस पर हम कुछ नहीं कह सकते वो हमारे आदरणीय हैं, इतने बड़े कथावाचक हैं। सवाल. क्या धमकी के बाद राजनजी कथा छोड़कर जाने वाले थे?
जवाब. देखिए, ये हमको नहीं पता है, मेरी राजनजी से 27 जनवरी से आजतक बातचीत नहीं हो सकी है। सवाल. आप मुख्य आयोजक हैं, फिर भी आपकी उनसे मुलाकात नहीं हुई?
जवाब. मुझसे वो बात नहीं करते, कारण ये है कि कथा की दूसरी आयोजक कुमुद जी हैं, मैं उनका कुलगुरु हूं। उनके पति मदन तिवारी ने 2023 में हमसे राजनजी के कथा के बारे में बोला था। उन्होंने कहा कि हम अरेंज कर रहे हैं, डेट फाइनल होते ही आपको जानकारी देंगे। अभी 6 महीने पहले मदन तिवारी ने कथा की डेट फाइनल होने के बाद हमसे मिले और आशीर्वाद लिया, तभी से मैं कथा की तैयारी में जुट गया था। मेरी जो भी बात होती थी, मदनजी से होती थी, मैंने कुमुदजी से कोई बात नहीं की। वो एक प्रोफेसर हैं, वो भी अपने विवेक का परिचय नहीं दे पाईं, अगर राजनजी हमारे और आपके कहने पर आए हुए हैं, तो दोनों लोग में आपसी समन्वय होना चाहिए। सवाल. क्या राजनजी महाराज रामकथा करने के बाद गोरखपुर से बाहर निकल जा रहे हैं?
जवाब. हां, परसों अपने घर गए थे, कल कहां गए थे…हमें जानकारी नहीं है। मैं पूरा प्रयास कर रहा हूं कि आने वाले श्रद्धालु कथा का रसपान करें। हजारों लोग दूसरे प्रदेश से भी आए हुए हैं। सवाल. राजनजी ने मंच से आरोप लगाया था कि उनसे मिलवाने के लिए 1100-1100 लिया जा रहा, ये कितना सही है? जवाब. देखिए, मैं किसी के दरवाजे पर गया नहीं था, मैं अकेले घूमता था, 3 महीने पहले मैंने अपने लड़के को बोला कि चारों तरफ इसका प्रचार शुरू करो। जिसके बाद महाराजगंज, देवरिया, पड़रौना, बढहलगंज में प्रचार करवाया। बहुत सी आबादी ऐसी है, जो गरीब हैं, मैंने उनके लिए काम किया। महाराजजी की धरती पर कथा हो रही है, मेरा जीवन सफल हो रहा है, इससे बड़ी बात मेरे लिए क्या होगी। मुझे पैसा की जरूरत नहीं, मेरे पास जो पैसा है, वही बहुत है। सवाल. कल समापन है, राजन जी से क्या कहना चाहते हैं?
जवाब. मैं सबसे अपील करता हूं, 4 फरवरी को विशाल भंडार है। कथा का रसपान करें और प्रसाद लें। मैं राजनजी से भी कहना चाहता हूं कि समापन के बाद प्रसाद ग्रहण करें, उसके बाद ही यहां से प्रस्थान करें। कथावाचक राजन महाराज के बारे में जानिए- कथावाचक राजन महाराज का जन्म 6 सितंबर 1982 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ था। उनका असली नाम राजन तिवारी है। वे बचपन से ही भगवान और धर्म में रुचि रखते थे। उनका परिवार बिहार के सिवान से है। घर का माहौल धार्मिक था। पिता शिवजी तिवारी खुद एक गुरु थे। उन्होंने राजन जी को बचपन से ही रामचरितमानस, धार्मिक कथाएं और संतों की बातें सुनाईं। इससे राजन जी के मन में भक्ति और ज्ञान बढ़ता गया। राजन जी ने कोलकाता के स्कॉटिश चर्च कॉलेज से पढ़ाई की। उन्होंने रसायन विज्ञान में बीएससी की डिग्री ली। वे स्वामी विवेकानंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस से बहुत प्रेरित थे। हालांकि, उन्होंने पढ़ाई की थी, लेकिन उनका मन आध्यात्म की ओर ज्यादा था। साल 2004 में उनकी मुलाकात प्रेम भूषण जी से हुई। उनसे प्रेरणा पाकर वे कथा सुनाने के मार्ग पर चल पड़े। साल 2011 में उन्होंने हावड़ा, कोलकाता में पहली बार श्री राम कथा सुनाई। यहीं से उनकी आध्यात्मिक यात्रा शुरू हुई। आज वे देश-विदेश में लोगों को अपनी कथाओं से प्रेरित करते हैं।
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