उत्तर प्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्री में हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए शासन बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। अब किसी भी बैनामे के लिए सिर्फ खरीदने और बेचने वाले पक्षों की मंजूरी ही काफी नहीं होगी। बल्कि उनके दस्तावेजों की गहन जांच भी अनिवार्य होगी। प्रदेशभर में एक ही जमीन पर कई बैनामे बनने के कई मामले सामने आ चुके हैं। इससे पक्षों में विवाद होता है और मामला कोर्ट पहुंच जाता है। निबंधन विभाग के अधिकारी अक्सर कहते हैं कि अगर दोनों पक्ष संतुष्ट हैं तो दस्तावेज जांचने की जरूरत नहीं। लेकिन अब यह बहाना नहीं चलेगा। कई पीड़ितों ने अपनी कमाई से मकान बनाया, फिर पता चला कि जमीन पहले से किसी और के नाम रजिस्ट्री हो चुकी है। इससे वे मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान होते हैं और विभाग के चक्कर काटते हैं। राहत न मिलने पर कोर्ट जाना पड़ता है। इन परेशानियों को देखते हुए शासन रजिस्ट्री से पूर्व अनिवार्य सत्यापन प्रणाली लागू करने जा रहा है। निबंधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रस्ताव तैयार हो चुका है। विधायी समिति और विधि आयोग से सैद्धांतिक सहमति मिल गई है। जल्द ही इसे लागू किया जाएगा। रजिस्ट्री से पहले आधार कार्ड, निवास प्रमाणपत्र समेत सभी दस्तावेज सरकारी पोर्टल या अधिकृत कार्यालय में जमा करने होंगे। गहन जांच के बाद जमीन विवादमुक्त होने की पुष्टि होगी। इससे धोखाधड़ी रुकेगी, लोगों को राहत मिलेगी और कोर्ट में भूमि विवाद कम होंगे।
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