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रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की उड़ान:​सुखोई की रफ़्तार रोकने से लेकर सियाचिन में रसद पहुँचाने तक, कानपुर के पैराशूट का दुनिया में डंका

कानपुर देश की रक्षा और स्वदेशी तकनीक के क्षेत्र में कानपुर स्थित ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड (GIL) ने एक नई मिसाल पेश की है। रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले इस सरकारी उपक्रम ने न केवल युद्ध के मैदान में भारतीय सेना की ताकत बढ़ाई है, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को सिद्ध करते हुए पैराशूट निर्माण में 95 प्रतिशत स्वदेशी कच्चे माल का उपयोग शुरू कर दिया है। कंपनी के कार्यवेक्षक मोहम्मद अनस ने संस्थान की उपलब्धियों और भविष्य की तैयारियों पर विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि किस तरह 80 वर्षों के अनुभव के साथ यह संस्थान अब पूरी तरह आधुनिक और आत्मनिर्भर तकनीक पर शिफ्ट हो चुका है। जब सुखोई-30, मिग-21, मिग-29 और जगुआर जैसे घातक लड़ाकू विमान 300 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की तूफानी रफ्तार से रनवे पर लैंड करते हैं, तो उन्हें सुरक्षित रोकना एक बड़ी चुनौती होती है। इस कठिन कार्य को ग्लाइडर्स इंडिया के ब्रेक पैराशूट बेहद आसानी से अंजाम देते हैं। मोहम्मद अनस के मुताबिक, इन विमानों को रोकने के लिए ये पैराशूट सबसे किफायती और भरोसेमंद जरिया हैं, जो पारंपरिक ‘शू-ब्रेक्स’ की तुलना में काफी सस्ते पड़ते हैं और विमान के रखरखाव में भी मददगार साबित होते हैं। हवाई ऑपरेशन्स के दौरान सैनिकों की सुरक्षा के लिए संस्थान P-7 और एमसीपीएस (Multi Combat Parachute System) जैसे मैन-कैरिंग पैराशूट तैयार कर रहा है। इनका उपयोग हमारे जांबाज पैराट्रूपर्स युद्ध के मैदान में या प्रशिक्षण के दौरान नीचे कूदने के लिए करते हैं। इसके साथ ही, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की लैब ADRDE द्वारा डिजाइन किए गए ‘हैवी ड्रॉप सिस्टम’ का निर्माण भी अब यहीं हो रहा है। इसकी मदद से 7 टन तक का भारी वजन, जिसमें राशन, सैन्य वाहन और गोला-बारूद शामिल है, सियाचिन और लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्रों में तैनात सैनिकों तक सुरक्षित पहुँचाया जा रहा है। तकनीकी विकास की दिशा में कंपनी ने एक बड़ा बदलाव करते हुए अब सिल्क के स्थान पर नायलॉन-66 का उपयोग शुरू कर दिया है। सबसे खास बात यह है कि इस निर्माण में लगने वाला 95 प्रतिशत कच्चा माल भारत के स्थानीय लघु उद्योगों यानी MSMEs द्वारा ही तैयार किया जाता है। इसके अलावा, यदि किसी आपात स्थिति में पायलट को विमान से बाहर निकलना पड़े, तो उसके जीवन की रक्षा के लिए विशेष ‘पायलट इजेक्शन सिस्टम’ पैराशूट भी इसी संस्थान की देन हैं। ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड के खाते में केवल सैन्य सफलताएं ही नहीं, बल्कि एक बड़ी आध्यात्मिक उपलब्धि भी जुड़ी है। मोहम्मद अनस ने गर्व के साथ बताया कि अयोध्या के भव्य श्री राम मंदिर के शिखर पर फहराने वाली विशेष ‘धर्म ध्वजा’ को भी इसी संस्थान ने तैयार किया है। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत काम करते हुए कानपुर की यह यूनिट अब विदेशी निर्भरता को खत्म कर भारतीय सेना के लिए एक अभेद्य कवच और राष्ट्र के गौरव का प्रतीक बन चुकी है।


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