उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने बोतलबंद पानी के 39 ब्रांड्स पर प्रतिबंध लगा दिया है। नमूनों की जांच में ये ब्रांड्स पीने योग्य नहीं पाए गए थे, जिसके बाद इनके निर्माण, आपूर्ति और बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई है। इस फैसले से जौनपुर के निवासियों में खुशी का माहौल है। जौनपुर के निवासियों ने इस निर्णय को अपनी लंबे समय से चली आ रही लड़ाई की जीत बताया है। पिछले कई महीनों से जिले में अवैध और निम्न गुणवत्ता वाले आरओ/पैकेज्ड वाटर प्लांट्स के खिलाफ एक जन-अभियान चलाया जा रहा था। इस प्रतिबंध के बाद अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों ने मिठाई बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया। जन-अभियान के संयोजक विकास तिवारी ने कहा- यह सिर्फ 39 ब्रांड्स पर प्रतिबंध नहीं, बल्कि जनता के स्वास्थ्य की जीत है। हमने अंबेडकर तिराहा पर हजारों हस्ताक्षर एकत्र किए थे और उच्चाधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाई थी। एफएसडीए का यह कड़ा कदम हमारे प्रयासों का ही परिणाम है। स्थानीय निवासी अतुल सिंह ने कहा कि अब बाजार में निम्न गुणवत्ता वाला पानी कम मिलेगा, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य को सुरक्षा मिलेगी। एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकेब के निर्देश पर जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जांच में पानी पीने योग्य नहीं पाया गया, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। प्रतिबंधित ब्रांड्स में गोरखपुर की रिप्लायबल फ्रेश, बस्ती की कीवी, चित्रकूट की क्वीन, गोंडा की सुपर फाइव स्टार, अंबेडकरनगर का एक्वा हेल्थी, लखनऊ का व्यूप्ट ब्रांड, बाराबंकी का किंग मेन, फतेहपुर का चिल, लखनऊ का फिट ब्रांड, उन्नाव का फू-फू पुक, देवरिया का एक्वा वालिडिन, रामपुर का एक्वा, मैनपुरी का ग्लोबल, प्रयागराज का नीट, गौतमबुद्धनगर का एक्वा बोट और आजमगढ़ का ग्लासिया जैसे नाम शामिल हैं। विकास तिवारी ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा- हमारी मांग है कि जौनपुर में भी स्थानीय स्तर पर सभी अवैध आरओ प्लांट्स की तत्काल जांच कर उन्हें सील किया जाए। हम जल्द ही इस मुद्दे पर फिर से एक बड़ा जन आंदोलन शुरू करेंगे। अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं ने सभी समर्थकों का धन्यवाद दिया और कहा कि जनता की जागरूकता से ही ऐसे सकारात्मक बदलाव संभव हैं।
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