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यूक्रेन की नताशा का जानवरों से प्रेम:हर साल सात समुंदर पार से आती है काशी, गली के कुत्तों को लगाया गले

वाराणसी की पावन नगरी एक बार फिर मानवता और सेवा भाव की मिसाल बनी है। इस बार चर्चा में हैं यूक्रेन की रहने वाली नताशा, जो पिछले 10 वर्षों से हर साल काशी आती हैं और यहां की गलियों में रहने वाले बेसहारा कुत्तों की निस्वार्थ सेवा करती हैं। नताशा इन दिनों वाराणसी के पाण्डेय घाट स्थित एक गेस्ट हाउस में रह रही हैं। 100 से अधिक कुत्तों को पहनाया कपड़ा
स्थानीय लोगों के अनुसार, नताशा जब भी काशी आती हैं, तो उनका अधिकांश समय गलियों में रहने वाले कुत्तों के साथ बीतता है। वह न सिर्फ उन्हें खाना खिलाती हैं, बल्कि उनकी देखभाल भी करती हैं। ठंड के मौसम में नताशा ने करीब 100 से अधिक कुत्तों के लिए विशेष रूप से कपड़े तैयार कराए और खुद गलियों में घूम-घूमकर उन्हें पहनाया, ताकि ठंड से उन्हें राहत मिल सके। काशी के सेवा भाव ने दिया सीख
नताशा के इस सेवा भाव को देखकर स्थानीय लोग भी काफी प्रभावित हैं। कई लोगों ने उनके कुत्तों के प्रति प्रेम और सेवा का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नताशा हर साल नियमित रूप से वाराणसी आती हैं और बिना किसी प्रचार के चुपचाप कुत्तों की सेवा करती हैं। नताशा का कहना है कि काशी की गलियों में उन्हें जो अपनापन और करुणा देखने को मिली, उसी ने उन्हें यहां के बेसहारा कुत्तों की सेवा के लिए प्रेरित किया। उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक संभव होगा, वह हर साल काशी आकर इन बेजुबानों की मदद करती रहेंगी। दैनिक भास्कर की टीम ने गली में रहने वाले लोगों से बात की
जहां नताशा रहती है वहां पर रहने वाले यश चतुर्वेदी ने बताया कि यह हर साल यहां पर आती हैं यहां रहने वाले कुत्तों से इनका काफी लगाव है। ठंड के समय में यह हर साल बनारस के हर गली में घूमती है जो भी आवारा कुत्ते हैं उनकी देखभाल भी करती है। उन्होंने बताया कि काशी ऐसे ही विदेश से आने वाले बहुत से पर्यटक हैं जिनका किसी न किसी चीज से लगाव है और वह यहां पर हर साल आते हैं।


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