पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने बरेली के परशुराम धाम में शासन से मिले आरोप पत्र (चार्जशीट) पर जोरदार प्रहार किया। उन्होंने कहा- शासन ने उन्हीं बिंदुओं को आधार बनाकर आरोप पत्र थमाया है, जिन्हें उन्होंने अपने इस्तीफे में उठाया था। देश की सरकार खुद भेदभाव के कानून बनाकर समाज को बांट रही है। जब मैं अपने वर्ग के हक के लिए आवाज उठाता हूं, तो मुझे चार्जशीट थमा दी जाती है। यह आरोप पत्र नहीं, बल्कि सच को दबाने की कोशिश है। मैं इन गीदड़ भभकियों से डरने वाला नहीं हूं और अब सीधे दिल्ली कूच की तैयारी है। मैं शासन के इन आरोपों को पूरी तरह हास्यास्पद करार देता हूं। इस्तीफे में संतों का अपमान और ‘रॉलेट एक्ट’ का जिक्र अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी 2026 को कमिश्नर के माध्यम से भेजे अपने इस्तीफे में दो मुख्य घटनाओं का उल्लेख किया था। पहला, प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द जी के शिष्यों और बटुक ब्राह्मणों के साथ स्थानीय प्रशासन द्वारा की गई मारपीट। उन्होंने इसे ब्राह्मण समाज का देशव्यापी अपमान बताया था। दूसरा, भारत सरकार द्वारा जारी UGC रेगुलेशन 2026, जिसे उन्होंने 1919 के ‘रॉलेट एक्ट’ जैसा काला कानून बताया था। उनका आरोप था कि ये नियम सामान्य वर्ग (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, कायस्थ आदि) के छात्रों के प्रति विषमता और शोषण को जन्म देंगे। हम गीदड़ भभकियों से नहीं झुकेंगे अलंकार अग्निहोत्री ने साफ तौर पर बताया- हम इन प्रशासनिक कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं। अब समय आ गया है कि सामान्य वर्ग के हितों की रक्षा के लिए एक वैकल्पिक राजनीतिक व्यवस्था का निर्माण किया जाए। वर्तमान सत्ता ‘देशी सरकार’ के बजाय ‘विदेशी जनता पार्टी’ की सरकार हो गई है। अग्निहोत्री ने एलान किया है कि अब मेरी लड़ाई बरेली से निकलकर सीधे दिल्ली की दहलीज तक पहुंचेगी। सरकार के जनप्रतिनिधि अपने समाज के प्रति जवाबदेह न होकर किसी कॉर्पोरेट कंपनी के नौकर की तरह काम कर रहे हैं। बरेली में हुआ जोरदार स्वागत बरेली के लाल फाटक स्थित परशुराम धाम पहुंचते ही समर्थकों ने उन्हें फूलों से लाद दिया और ‘शेर आया’ के नारों से आसमान गुंजा दिया। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद पहली बार सार्वजनिक मंच पर आए अलंकार ने अब सीधे केंद्र सरकार के खिलाफ ‘आर-पार’ की जंग का ऐलान किया है। 7 फरवरी तक का दिया अल्टीमेटम अलंकार अग्निहोत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमारा अगला लक्ष्य देश के ‘काले कानून’ यानी एससी-एसटी एक्ट को खत्म कराना है। उन्होंने केंद्र सरकार को 7 फरवरी तक का समय देते हुए कहा कि अगर विशेष संसद सत्र बुलाकर इस ‘ड्रैकनियन एक्ट’ (क्रूर कानून) को खत्म नहीं किया गया, तो देशव्यापी आंदोलन होगा। उन्होंने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह कानून सामान्य और ओबीसी वर्ग के साथ अन्याय है। अपनी बात कहना अपराध नहीं इस्तीफे के बाद प्रशासन की ओर से मिले नोटिस और आरोप पत्र पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। अपने समाज और सामान्य वर्ग के हक की बात करना अपराध कैसे हो गया? सरकार खुद यूजीसी रेगुलेशन 2026 और एससी-एसटी एक्ट के जरिए समाज में विभेद पैदा कर रही है, और जब हम इसके खिलाफ आवाज उठाते हैं तो हमें आरोप पत्र दिए जाते हैं।” ये आरोप हास्यास्पद है। अब कानूनी लड़ाई लड़ने की बारी है। नेता ‘रीढ़विहीन’, बोले- अब विकल्प तलाश रहे राजनीतिक दलों पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि आज के जनप्रतिनिधि ‘आका’ के फोन का इंतजार करते हैं, उनमें सच बोलने की हिम्मत नहीं है। देश अब ‘सनातनी बनाम गैर-सनातनी’ विचारधारा पर बंट चुका है। जब उनसे तीसरे विकल्प के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल ध्यान आंदोलन पर है, लेकिन आने वाली नस्लों के भविष्य को बचाने के लिए जल्द ही नए विकल्पों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने दिल्ली कूच करने को भी कहा। शंकराचार्य के अपमान पर कमिश्नर और प्रशासन मांगे माफी प्रयागराज की घटना का जिक्र करते हुए पूर्व पीसीएस अधिकारी ने कहा कि कल ही मेरी मुलाकात बनारस में शंकराचार्य जी से हुई है। उन्होंने कहा कि जिस तरह बटुकों की शिखा पकड़कर उन्हें पीटा गया, वह अक्षम्य है। उन्हें सूचना मिली है कि मुख्यमंत्री ने इस मामले में टीम गठित की है। अलंकार ने मांग की कि इस अपमान के लिए जिला प्रशासन और कमिश्नर को माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सनातन परंपरा के साथ खिलवाड़ बंद नहीं हुआ, तो परिणाम गंभीर होंगे। शंकराचार्य से मिलने पहुंचे थे अलंकार अग्निहोत्री इस्तीफा देने के बाद बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री रविवार को कानपुर से वाराणसी पहुंचे थे। यहां पहुंचकर उन्होंने मठ में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मौनव्रत थे। जिसके चलते उनकी इशारों में बातचीत हुई। अलंकार अग्निहोत्री ने अपनी आगे की रणनीति बताई। शंकराचार्य उनकी बातें सुनते रहे। अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा
पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी को इस्तीफा दिया था। जिसके बाद सिस्टम में खलबली मच गई थी। मंगलवार को जब वे दोबारा बरेली के परशुराम धाम पहुंचे, तो प्रशासन द्वारा थमाए गए ‘आरोप पत्र’ पर पलटवार करते हुए उन्होंने इसे पूरी तरह हास्यास्पद करार दिया। अब जानिए अलंकार अग्निहोत्री के बारे में… अलंकार अग्निहोत्री कानपुर के रहने वाले हैं। बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था। मां बैंक में थीं। 1998 में यूपी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में अलंकार को 21वां स्थान मिला। इसके बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय से बीटेक किया और नौकरी करने लगे। 2014 में जब अलंकार के सभी छोटे भाई सेटल हो गए। बहन की शादी हो गई, तो उन्होंने नौकरी छोड़कर UPPCS की तैयारी की और 2019 में एग्जाम क्वालिफाई किया।
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