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मेजर का घर कब्जाने वाला एक अन्य गिरफ्तार:बेटी ने मुख्यमंत्री से लगाई थी गुहार, 24 घंटे में पुलिस दिलाया ने मकान

लखनऊ के इंदिरानगर स्थित मकान पर अवैध कब्जे के मामले में मुख्यमंत्री से फरियाद के बाद पुलिस ने 24 घंटे के अंदर कार्रवाई करते हुए पीड़िता को उसका घर वापस दिला दिया। इस मामले में अब तक तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। निर्वाण रिहैब सेंटर, सूर्या सिटी तकरोही की रहने वाली अंजना भट्ट ने बताया कि इंदिरानगर ए-418 स्थित मकान का ताला तोड़कर अवैध रूप से प्रवेश किया। आरोप है कि घर में रखा कीमती सामान, जिसमें कपड़े, बर्तन, फ्रिज, टीवी, फर्नीचर, महत्वपूर्ण दस्तावेज और लाखों रुपये का घरेलू सामान शामिल है, उठा ले गए और मकान पर कब्जा कर लिया।पुलिस सात आरोपियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। विवेचना के दौरान बलवंत कुमार यादव और मनोज कुमार यादव को 1 जनवरी को गिरफ्तार कर जेल भेजा। सोमवार को पुलिस ने बंधा रोड के पास से तीसरे आरोपी सत्यम पांडेय (32), निवासी लंका सिटी, रामनगर वाराणसी को गिरफ्तार किया। अन्य वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद मिला न्यायरिहैब सेंटर के डॉक्टर संतोष दुबे ने बताया कि अंजना को वर्ष 2016 में इलाज के लिए सेंटर लाया गया था। कुछ दिन पहले उनके मकान पर कब्जे की जानकारी मिलने पर थाने में शिकायत दी गई। इसके बाद अंजना की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कराई गई। मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस हरकत में आ गई और 24 घंटे के भीतर जांच कर अंजना को उनका मकान दिला दिया गया। घर में कदम रखते ही भावुक हुईं अंजनागुरुवार को पुलिस और सेना के अधिकारियों की मौजूदगी में जब अंजना अपने घर में दाखिल हुईं तो भावुक हो गईं। उन्होंने घर के हर कमरे की दीवारों को चूमा, नारियल फोड़ा और दीप जलाकर पूजा की। पड़ोस की महिलाओं से लिपटकर रो पड़ीं और अपने बचपन की यादें साझा कीं। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा, “थैंक्यू योगी अंकल, गॉड ब्लेस यू।” मेजर पद पर थे पिताअंजना के पिता स्वर्गीय बिपिन चंद्र भट्ट भारतीय सेना में मेजर थे। उनका देहांत साल 1994 में हो गया था। परिवार में एक पुत्र और दो पुत्रियां थीं, जिनमें से बेटे और एक बेटी का निधन हो चुका है। परिवार में अब केवल अंजना ही हैं। सिजोफ्रेनिया से पीड़ित होने के कारण उनका इलाज रिहैब सेंटर में चल रहा था। आरोप है कि इसी दौरान बलराम यादव और मनोज कुमार यादव ने उनकी जमीन पर बोर्ड लगाकर फर्जी कागजात के जरिए कब्जा करने की कोशिश की।


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