संगम की रेती पर अध्यात्म और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। माघ मेला क्षेत्र में मंगलवार की शाम सुरों के नाम रही। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (NCZCC) और संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “चलो मन गंगा–यमुना तीर” कार्यक्रम में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि कड़ाके की ठंड और रिमझिम बारिश के बावजूद श्रोता अपनी जगह से टस से मस नहीं हुए। सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण पद्मश्री महावीर गुड्डू की ओजस्वी प्रस्तुति रही। जैसे ही मंच से उनकी बुलंद आवाज में शिव लहरी… बोल बम, बोल बम के स्वर गूंजे, पंडाल में मौजूद दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। बारिश की बूंदों के बीच महादेव की भक्ति में डूबे श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे। गुड्डू ने न केवल भक्ति रस बल्कि हरियाणा की माटी की खुशबू भी प्रयागराज की धरती पर बिखेरी।
उन्होंने चंदन की मेरी बांसुरी…पानी अली पानी पिया दे और ,मेरे मन में बस गयो श्याम सांवरिया, जैसे गीतों से माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। इसके बाद गोरी हमारे गांव की गोरी चली पानी लेने और मेरे देश की धरती सोना उगले जैसे गीतों के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण संस्कृति और देशभक्ति का जज्बा जगाया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में भोजपुरी गायक राजेश तिवारी ने अपने चिर-परिचित देसी अंदाज में मोर्चा संभाला। उन्होंने हंकी संगम घुमाई दा और देहाती रसगुल्ला खिलाई दा जैसे लोकप्रिय गीतों से युवाओं को थिरकने पर मजबूर कर दिया। वहीं “होली खेले रघुवीरा अवध में की प्रस्तुति ने माघ मेले में ही फागुन के रंगों का अहसास करा दिया। शास्त्रीय और सुगम संगीत के प्रेमी पाठकों के लिए सौरभ श्रीवास्तव ने अपनी गायकी से विशेष छाप छोड़ी। उन्होंने “दया करो देव” और रंगी सारी अनाड़ी जैसी रचनाओं के जरिए श्रोताओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराया। कार्यक्रम में केवल संगीत ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। मुख्य अतिथियों नंद किशोर केसरवानी, डॉ. उत्सव भारती, डॉ. आदित्य श्रीवास्तव (उपनिदेशक) और डॉ. मुकेश उपाध्याय ने कलाकारों को स्मृति चिन्ह के स्थान पर जीवित पौधे भेंट कर सम्मानित किया।
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