प्रयागराज माघ मेला क्षेत्र में “चलो मन गंगा–यमुना तीर” सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इस दौरान मंच पर श्रीकृष्ण की कालिया मर्दन लीला का सजीव मंचन प्रस्तुत किया गया। यह आयोजन उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत कृष्ण लीला आधारित नृत्य नाटिका से हुई। तरुण चोपड़ा और उनके साथी कलाकारों ने बालकृष्ण के जन्म से लेकर यमुना तट पर कालिया नाग के दमन तक की कथा को नृत्य और अभिनय के माध्यम से जीवंत किया। कालिया नाग के मंच पर प्रवेश करते ही दर्शकों में उत्सुकता बढ़ गई। श्रीकृष्ण के यमुना में कूदने, कालिया नाग पर नृत्य करते हुए उसका अहंकार चूर करने और अंत में उसे क्षमा कर यमुना से बाहर भेजने का दृश्य दर्शकों ने देखा। इस प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियां बजाईं और जयकारे लगाए। कालिया मर्दन के अतिरिक्त, कलाकारों ने श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़ी विभिन्न लीलाएं भी प्रस्तुत कीं। इनमें माखन चोरी, गोपियों संग रास, फूलों की होली, मयूर नृत्य, लठमार होली और राधिका रानी के साथ प्रेम प्रसंग जैसे दृश्य शामिल थे। इसके बाद मथुरा से आए अरुण रावल और उनके दल ने ब्रज लोकगीतों की प्रस्तुति दी। उन्होंने “रंगीली मनमोहन होरी रे” और “श्री गोवर्धन गिरधारी” जैसे गीत गाए। जटाशंकर एवं दल ने चोलर लोकनृत्य प्रस्तुत किया, जबकि हरिश्चंद्र पाण्डेय ने भजन “अच्युतम केशवम् राम दामोदरम्” गाया। मुख्य अतिथि प्रो. अखिलेश दुबे, केंद्र उपनिदेशक डॉ. आदित्य कुमार श्रीवास्तव और उपनिदेशक (कार्यक्रम) डॉ. मुकेश उपाध्याय ने कलाकारों को पौधा भेंट कर सम्मानित किया। इस सांस्कृतिक संध्या का उद्देश्य कालिया मर्दन की लीला के माध्यम से धर्म, सत्य और प्रेम का संदेश देना था।
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