प्रयागराज में माघ मेला 3 जनवरी यानी कल से शुरू हो रहा है। 15 फरवरी तक चलने वाले माघ मेला के लिए 800 हेक्टेयर में टेंट सिटी बसाई जा चुकी है। ये 2024 के माघ मेला से ज्यादा भव्य है, पिछले मेला से 32 हेक्टेयर ज्यादा एरिया में फैला हुआ है। इस बार 15 करोड़ लोगों के आने का अनुमान है, जबकि 2024 में 6 करोड़ लोग माघ मेला आए थे। 2025 में महाकुंभ होने की वजह से माघ मेला नहीं लगा था। पहली बार AI कैमरों से श्रद्धालुओं की निगरानी रखी जाएगी। अध्यात्म के साथ लोगों को यहां नया अनुभव हो, इसके लिए VIP मूवमेंट खत्म कर दिया गया है। जगह-जगह फाउंटेन बनाए गए हैं, हेलीकाप्टर राइड से लेकर कला ग्राम भी बसाया जा रहा है। स्नान के लिए त्रिवेणी संगम के साथ अरैल घाट और दारागंज घाट पर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। 8 Km लंबे अस्थाई घाट तैयार किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को दिक्कत न हो। पौष शुक्ल एकादशी से माघ मेले में कल्पवासियों का आना शुरू हो गया है। 45 दिन के कल्पवास और माघ मेला का आध्यात्मिक महत्व क्या है? ये जानने के लिए दैनिक भास्कर टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची। पढ़िए रिपोर्ट… पीठाधीश्वर बोले- 2 समय स्नान, 1 समय का आहार
कल्पवास को समझने के लिए हमारी टीम माघ मेला के ओल्ड जीटी रोड पर लगे चरखी दादरी आश्रम में पहुंची। यहां अखिल भारतीय दंडी सन्यासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्मश्रम महाराज से मुलाकात की। माघ मेला क्या है? अहम क्यों है? इस पर उन्होंने कहा- जिस वक्त मकर राशि पर सूर्य का प्रवेश होता है, तब माघ मेला शुरू होता है। तब करोड़ों लोग यहां आकर कल्पवास करते हैं। कल्पवासी सुबह और शाम, दो समय पर गंगा स्नान करते हैं। 1 समय आहार लेते हैं। यहां अपनी कुटिया में साधना करते हैं। भक्ति ज्ञान वैराग्य की होने वाली चर्चा को सुनकर अपने अंदर ऊर्जा महसूस करते हैं। 45 दिन बाद उसी ऊर्जा को लेकर वो अपने घरों में वापस जाते हैं। 1 महीने में वो जितनी ऊर्जा लेते हैं, उससे 11 महीने वाले बेहतर जिंदगी बिता पाते हैं। वह कहते हैं- अखाड़ों के शिविर लगते हैं। पूरे भारत से साधु-संत यहां आते हैं, यह स्थान उनकी तपस्थली बनती है। माह मेले में प्रवचन, कथा और यज्ञ का आयोजन होता है। यहां आने वाले यात्री देसी खानपान और ग्रामीण संस्कृति का अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। यह उन यात्रियों के लिए आदर्श है, जो भीड़ से दूर रहकर आध्यात्मिक भारत को महसूस करना चाहते हैं। जानिए माघ मेला में कब-कब स्नान होंगे मकर संक्राति और मौनी अमावस्या पर होंगे महास्नान
हर साल माघ मेले की शुरुआत पौष पूर्णिमा से होती है, जोकि महाशिवरात्रि तक चलता है। 2025 में महाकुंभ होने की वजह से माघ मेला नहीं हुआ था। इससे पहले 2024 में माघ मेला हुआ था। इस साल माघ मेले की शुरुआत 3 जनवरी, 2026 से हो रही है, जोकि महाशिवरात्रि 15 फरवरी तक चलेगा। इस बीच मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या जैसे महत्वपूर्ण दिनों में महास्नान होंगे। 2 अखाड़े शामिल होंगे, टेंट लग चुके हैं
महाकुंभ-2025 में 14 अखाड़े शामिल हुए थे। माघ मेला में शाही स्नान नहीं होता है, बावजूद इसके माघ मेला में जूना अखाड़ा और निरंजनी अखाड़े के संत शामिल होंगे। इन अखाड़ों के टेंट लग चुके हैं, जोकि मेला क्षेत्र में दाखिल होते ही दूर से दिखने लगते हैं। आश्रम के अंदर वो सभी सुविधाएं मौजूद हैं, जोकि घरों में होती हैं। इलेक्ट्रिक सप्लाई है, टेंट को गरम रखने के लिए हीटर लगे हैं। टीवी भी लगाई गई है, आश्रम की अनुमति के बाद ही लोग यहां आकर ठहर भी सकते हैं। इसके अतिरिक्त, कल्पवासियों के लिए टेंट लग चुके हैं। पहली बार किन्नर अखाड़े की संत करेंगी कल्पवास
संगम तट पर नियम, संयम और साधना के साथ चलने वाले कल्पवास की परंपरा में इस बार नया अध्याय जुड़ रहा है। पहली बार किन्नर अखाड़े की 25 संत माघ मेले के दौरान पूरे एक माह का कल्पवास करेंगी। इसमें किन्नर अखाड़ा और सनातनी किन्नर अखाड़ा, दोनों शामिल होंगे। किन्नर अखाड़े की 26 वर्षीय महामंडलेश्वर नंद गिरि बाबा की गुरु मां की इच्छा से यह पहली बार कल्पवास किया जा रहा है। उन्होंने कहा- हम कल्पवास की परंपरा की नई शुरुआत करना चाहते हैं। एक माह तक सभी धार्मिक विधि-विधानों का पालन किया जाएगा। वहीं, किन्नर अखाड़े की वंशीय संन्यासी नंद गिरि ने कहा- मन में लंबे समय से कल्पवास करने की भावना थी। इस बार अनुकूल स्थिति में रहकर पूरे एक माह तक कल्पवास करने का निर्णय लिया है। हमारे साथ कई अन्य राज्यों और प्रदेशों से भी किन्नर समाज के लोग कल्पवास के लिए प्रयागराज पहुंच रहे हैं। होटल पर रेट लिस्ट लगेगी, ओवर रेटिंग नहीं होगी
प्रयागराज में छोटे बड़े करीब 5 हजार होटल-रेस्टोरेंट हैं। माघ मेला से पहले होटल स्टे को लेकर एडमिनिस्ट्रेशन अलर्ट है। मालिकों के साथ मीटिंग करके तय किया गया है कि 15 करोड़ लोग आएंगे, इसलिए होटल के कमरे की बुकिंग के रेट पहले ही सार्वजनिक करने होंगे। होम स्टे के रेट भी तय होंगे। ताकि लोगों को ज्यादा रुपए न चुकाने पड़े। रेस्टोरेंट मालिकों को अच्छी क्वालिटी के व्यंजन खिलाने के लिए कहा गया है। पहली बार माघ मेले में रिवर एम्बुलेंस
इस माघ मेला में पहली बार 2 रिवर एम्बुलेंस लगाई गई हैं। पिछले माघ में 30 एम्बुलेंस लोगों को सुविधा दे रही थीं, मगर महाकुंभ में हादसे के बाद 80 एम्बुलेंस लगा दी गईं हैं। लोगों को 1 तरफ से दूसरी तरफ लेकर जाने के लिए 9 पांटून पुल बनाए गए हैं। मेला क्षेत्र को 7 सेक्टर में बांटा जा रहा है। इस बार झूंसी बस अड्डे से 2250 बस चलेंगी
यूपी रोडवेज मेले में इस बार 3800 बसों का संचालन करेगा। इनमें से 2250 बसों का संचालन झूंसी से होगा। साथ ही, शहर से अलग-अलग एरिया के लिए भी शटल बसों का संचालन किया जाएगा। झूंसी में बसों के संचालन की वजह से संगम क्षेत्र में जाम की समस्या कम होगी। …………………
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