महराजगंज के बृजमनगंज ब्लॉक में खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) कृष्णकांत शुक्ला द्वारा ग्राम पंचायत सचिवों का क्लस्टर आवंटन बिना जिलाधिकारी (डीएम) के अनुमोदन के किए जाने का मामला सामने आया है। नियमों के अनुसार, सचिवों का क्लस्टर आवंटन डीएम की स्वीकृति के बिना प्रभावी नहीं माना जाता, लेकिन बीडीओ ने इस नियम का उल्लंघन करते हुए आदेश जारी कर दिया। यह मामला 27 नवंबर, गुरुवार को जारी पत्र क्रमांक 1653 से जुड़ा है। इस आदेश के तहत पिपरा परसौनी क्लस्टर (जिसमें पिपरा परसौनी, गुरचिहा और बडिहारी ग्राम पंचायतें शामिल हैं) के सचिव प्रमोद कुमार सोनी को हटाकर सर्वेश कुमार सोनकर को नियुक्त किया गया था। पत्र में इस बदलाव को ‘तत्काल प्रभावी’ बताते हुए पुराने सचिव को सभी अभिलेख नए सचिव को तुरंत सौंपने का निर्देश दिया गया था। इस आदेश का मुख्य विरोधाभास यह था कि एक ओर सचिव परिवर्तन को तत्काल प्रभावी बताया गया, वहीं दूसरी ओर इसी पत्र की प्रतिलिपि में बीडीओ ने जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) से जिलाधिकारी से अनुमोदन कराने का अनुरोध किया था। यह दर्शाता है कि आदेश बिना पूर्व अनुमोदन के ही लागू कर दिया गया था, जो नियमों के विपरीत है। यह विरोधाभासी और मनमाना आदेश पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया। मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचते ही ब्लॉक प्रशासन में हड़कंप मच गया। सोशल मीडिया पर आदेश के वायरल होने और बढ़ते दबाव के बाद, बीडीओ कृष्णकांत शुक्ला ने इसे ‘क्लर्कियल मिस्टेक’ बताते हुए 28 नवंबर को अपना ही आदेश तत्काल निरस्त कर दिया। ब्लॉक के कई कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बीडीओ अक्सर मनमाने तरीके से आदेश जारी करते रहे हैं। उनका कहना था कि इस बार भी क्लस्टर आवंटन नियमों के विपरीत किया गया था, जिसे हंगामा होने के बाद वापस लेना पड़ा। इस पूरे प्रकरण ने ग्राम पंचायत सचिवों की नियुक्ति प्रक्रिया, प्रशासनिक पारदर्शिता और बीडीओ के कार्य करने के तौर-तरीकों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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