भास्कर न्यूज | फतेहपुर फतेहपुर से सटे मसलिया के सीतपहाड़ी मोड़ से मसानजोर तक चल रहे लगभग चालीस किलोमीटर सड़क निर्माण एवं चौड़ीकरण कार्य को ग्रामीणों ने मुआवजा नहीं मिलने के विरोध में शनिवार को रोक दिया। कुकुरतोपा गांव के पास दर्जनों गांवों के सैकड़ों रैयतों ने सड़क पर प्रदर्शन करते हुए चुनका गाड़कर साफ कहा कि जब तक दबाई गई जमीन का समुचित मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीण नागेश्वर मुर्मू, मानवेल टुडु, मनोज मुर्मू और मानवेल हांसदा ने बताया कि सड़क निर्माण के दौरान गरीब रैयतों की जमीन को बिना मापी कब्जे में ले लिया गया। इसके बावजूद न तो भू-अर्जन की प्रक्रिया शुरू की गई और न ही किसी प्रकार का मुआवजा देने की पहल की गई। ग्रामीणों ने कहा कि राज्य के मुखिया हेमंत सोरेन बार-बार कहते हैं कि गरीब आदिवासियों की जमीन न सरकार ले सकती है और न कोई कंपनी, लेकिन यहां तीन महीनों से सड़क निर्माण के नाम पर जबरन जमीन ली जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण कंपनी की ओर से न तो कोई बैठक हुई और न ही परियोजना से संबंधित सूचना बोर्ड लगाया गया। कार्य पीडब्ल्यूडी विभाग से करोड़ो की लागत से बन रहा है। पूरा कार्य ग्रामीणों को अंधेरे में रखकर किया जा रहा है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण और विकास कार्य का वे विरोध नहीं करते, लेकिन जमीन के बदले उचित मुआवजा मिलना जरूरी है। यदि सड़क पूरी हो गई, तो बाद में वे ठगे जाने जैसा महसूस करेंगे और आवाज उठाना भी मुश्किल होगा। ग्रामीणों ने इस संबंध में भू-अर्जन पदाधिकारी, जिला उपायुक्त और अंचल अधिकारी को चार महीने पहले लिखित आवेदन दिया था, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हुई है। नाराज ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि मुआवजा नहीं, तो सड़क निर्माण नहीं, और कार्यस्थल पर डटे रहे।
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