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मनोज बाजपेई, नीरज पांडे के पुतले को चप्पलों-लातों से पीटा:घूसखोर पंडत के खिलाफ सड़क पर उतरा ब्राह्मण समाज, बैन की मांग

फिल्म अभिनेता मनोज बाजपेयी की नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज घूसखोर पंडित का विवाद अब बढ़ गया है। रिलीज से पहले ही फिल्म को लेकर प्रदेश भर में समाज के विभिन्न वर्गों में तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस पर लगातार विरोध बढ़ता जा रहा है। खासकर ब्राह्मण समाज और धार्मिक संगठनों का आरोप है कि फिल्म ब्राह्मणों का अपमान करती है, और समाज में विभाजन की भावना को बढ़ावा देती है। प्रयागराज में इसका विरोध प्रदर्शन राष्ट्रीय परशुराम सेना (ब्रह्मवाहिनी) द्वारा किया गया, जिसने फिल्म के खिलाफ अपने गुस्से को खुले तौर पर प्रदर्शित किया। ब्राह्मण समाज के सम्मान को चोट पहुँचाने का आरोप लगाते हुए, सिविल लाइंस के सुभाष चौराहे पर पुतला दहन का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने फिल्म के निर्माता नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी के पुतले को चप्पलों से पीटा और जलते हुए पुतले को जमीन पर गिराकर लातों से मारा। यह प्रदर्शन इस बात का संकेत था कि ब्राह्मण समाज इस फिल्म को लेकर कितनी गहरी नाराजगी महसूस कर रहा है। राष्ट्रीय परशुराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित विमल तिवारी ने फिल्म को ब्राह्मण विरोधी करार देते हुए कहा, “यह फिल्म एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ब्राह्मणों को नीचा दिखाना और समाज में नफरत फैलाना है। फिल्म के नाम में ही ‘घूसखोर पंडित’ शब्द का इस्तेमाल यह साबित करता है कि इसके निर्माता और निर्देशक की मानसिकता समाज-विरोधी है। हम इसका पूरी ताकत से विरोध करते हैं और सरकार से मांग करते हैं कि इस फिल्म की रिलीज़ पर तत्काल रोक लगाई जाए।” उन्होंने आगे कहा, “यह फिल्म ब्राह्मणों की गरिमा को ठेस पहुँचाने के अलावा, हिंदू धर्म की नींव को भी कमजोर करती है। जिस तरह से फिल्म में ब्राह्मणों को ‘घूसखोर’ के रूप में प्रस्तुत किया गया है, उससे पूरे समाज की छवि पर गलत असर पड़ेगा। हम इस फिल्म के निर्माताओं और कलाकारों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करते हैं।” प्रदर्शनकारियों ने फिल्म के खिलाफ नारेबाजी की और फिल्म से जुड़े हर व्यक्ति को सख्त सजा देने की मांग की। यह विरोध फिल्म के टाइटल पर आधारित था, जो ब्राह्मणों को एक नकारात्मक रोशनी में पेश करता है। इसके अलावा, फिल्म के टाइटल और उसके प्रचार सामग्री को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं, जिन्हें जातिवाद और सामाजिक विभाजन की ओर इशारा करने वाला माना जा रहा है। साधु-संतों और अन्य धार्मिक संगठनों का भी यह आरोप है कि बॉलीवुड में एक खास वर्ग द्वारा लगातार सनातन धर्म और विशेष रूप से ब्राह्मणों को निशाना बनाया जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर पहले भी कई फिल्में विवादों में आ चुकी हैं, लेकिन घूसखोर पंडित को लेकर यह विरोध कहीं अधिक उग्र और संगठित रूप से सामने आया है। ब्राह्मण समाज की ओर से एकता और विरोध की इस लहर ने अब फिल्म निर्माता और निर्देशक नीरज पांडे के खिलाफ गंभीर आरोपों का सामना करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही, यह मुद्दा सोशल मीडिया पर भी छा गया है, जहां हजारों लोग फिल्म के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं और #BanGhuskhorPandit जैसे हैशटैग चला रहे हैं। प्रशासन और राजनीतिक दल भी इस मामले में सक्रिय हो गए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए, इस फिल्म को लेकर जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। फिलहाल, यह देखना होगा कि क्या इस फिल्म की रिलीज़ को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।


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