केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा में प्रस्तावित बदलावों के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी मथुरा ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपकर बदलावों को तुरंत वापस लेने की मांग की। सरकार पर योजना कमजोर करने का आरोप
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मुकेश धनगर ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार मनरेगा के मूल स्वरूप को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि सरकारी नीतियों के चलते ग्रामीण गरीबों को रोजगार के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि सूचना का अधिकार और शिक्षा का अधिकार जैसे जनकल्याणकारी प्रावधान भी प्रभावित हो रहे हैं।
योजना की उपलब्धियां गिनाईं
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि मनरेगा को विश्व स्तर पर सराहा गया है और इसे एक प्रभावी योजना माना जाता है। उनका दावा है कि कोविड-19 महामारी के दौरान इस योजना ने करीब 4.6 करोड़ परिवारों को रोजगार दिया। अब तक 180 करोड़ से अधिक मानव कार्य दिवस सृजित हो चुके हैं और लगभग 10 करोड़ परिसंपत्तियां—जैसे सड़कें, तालाब और अन्य ग्रामीण विकास कार्य—बनाए गए हैं। 500 रुपए प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित करने की भी मांग
जिला कांग्रेस कमेटी ने सरकार से मनरेगा के तहत कार्य दिवसों की संख्या बढ़ाने, हर ग्रामीण को रोजगार और पूरी मजदूरी की गारंटी देने की मांग की। साथ ही काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता और श्रमिकों को कम से कम 500 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई। आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन में जिला कांग्रेस कमेटी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आगे बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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