युवा गांधीवादियों द्वारा निकाली जा रही ‘मनरेगा बचाओ यात्रा’ गुरुवार को मऊ जिला कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची। इस दौरान यात्रा में शामिल युवाओं और कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया और अपनी मांगें रखीं। कांग्रेस नेता संजय यादव ने बताया कि यह यात्रा 17 जनवरी को गोरखपुर के चौरी-चौरा से शुरू हुई थी। देवरिया और बलिया होते हुए यह बुधवार को मऊ पहुंची, और अब आगे गाजीपुर की ओर रवाना होगी। यादव ने कहा कि यात्रा का मुख्य उद्देश्य जन-जागरण है। मनरेगा के नाम बदलने और इसकी संवैधानिक व्यवस्थाओं में बदलाव के विरोध में विश्वविद्यालयों के छात्रों और विभिन्न राजनीतिक दलों का लगातार सहयोग मिल रहा है। अरविंद मूर्ति ने बताया कि छात्रों और नौजवानों का यह कारवां चौरी-चौरा के ऐतिहासिक जन आंदोलन से प्रेरित है। यात्रा की मुख्य मांग मनरेगा कानून को बहाल करना और ‘जीबी राम जी’ को रद्द करना है। नेताओं का कहना है कि आजादी के 75 वर्षों में मनरेगा पहला ऐसा कानून था जिसने काम की गारंटी दी थी। उनका दावा है कि इस कानून को कमजोर करना मोदी सरकार का आत्मघाती कदम है। नेताओं ने दावा किया कि किसान, मजदूर, नौजवान, वकील सहित समाज का हर वर्ग इस कानून के पक्ष में है। मनरेगा कानून की बहाली के लिए गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इस अवसर पर बीएचयू के छात्र रजत, अरविंद मूर्ति, संजय यादव सहित कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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