मथुरा में अखिल भारतीय समता फाउंडेशन ने भारत की प्रथम महिला शिक्षिका और नारी शिक्षा की प्रणेता माता सावित्रीबाई फुले की 195वीं जयंती मनाई। इस अवसर पर पुष्पांजलि सभा और ‘भारत में महिला शिक्षा’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व चौधरी गुलाब सिंह ने किया, जबकि संचालन विवेक कुमार ने किया। जयंती समारोह की शुरुआत माता सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित करने के साथ हुई। मुख्य अतिथि समाजसेवी एडवोकेट कौशल सिंह और पुष्पेंद्र कुमार का साफा पहनाकर एवं फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने सावित्रीबाई फुले के संघर्षपूर्ण जीवन, सामाजिक बाधाओं के बावजूद शिक्षा के प्रसार और महिला शिक्षा के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। एडवोकेट अरविंद कुमार सिंह गुलशन, पार्षद कृष्ण कुमार और अजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि सावित्रीबाई फुले के प्रयास आज भी शिक्षा जगत में मार्गदर्शक हैं। उन्होंने बताया कि कठिन सामाजिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने बालिकाओं और वंचित वर्गों की शिक्षा के लिए विद्यालय स्थापित कर समाज में परिवर्तन की नींव रखी। वक्ताओं ने केंद्र सरकार से सावित्रीबाई फुले के जन्मदिन को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने और उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की मांग की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे लुकेश कुमार राही ने सावित्रीबाई फुले को भारत में नारी सशक्तिकरण का प्रतीक बताया और कहा कि उनका जीवन वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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