मथुरा के नगला भूरिया गांव में भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसमें किसानों ने अपनी समस्याओं के समाधान न होने पर शासन-प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश व्यक्त किया और आंदोलन की चेतावनी दी। बैठक में किसानों ने आरोप लगाया कि अधिकारी वर्ग उनकी समस्याओं के प्रति संवेदनशील नहीं है, जिसके कारण उन्हें लगातार उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। प्रमुख समस्याओं में निराश्रित गोवंश द्वारा फसलों को पहुंचाया जा रहा नुकसान और मथुरा मंडी में किसानों के साथ हो रहा उत्पीड़न शामिल था। भाकियू के जिला उपाध्यक्ष नवल सिंह, तहसील अध्यक्ष सत्यवीर और ब्लॉक अध्यक्ष तुलसी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आवारा पशु किसानों की खड़ी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मंडी में फसल की तौल के दौरान किसानों को कम वजन बताकर अधिक वजन लिया जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। किसानों ने अपनी प्रमुख मांगें भी रखीं। उन्होंने कहा कि मथुरा मंडी में तौल में हो रही धांधली पर तत्काल रोक लगाई जाए। आलू किसानों को उनकी फसल का लागत मूल्य तक नहीं मिल पा रहा है, इसलिए प्रदेश सरकार आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य कम से कम 1200 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करे। साथ ही, किसानों की दयनीय आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्हें पूर्ण रूप से कर्ज मुक्त किया जाए। तहसील अध्यक्ष सत्यवीर ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो पहले तहसील का घेराव किया जाएगा और उसके बाद जिला मुख्यालय पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता परमो नेताजी ने की और संचालन तुलसी दास ने किया। इस दौरान केशव, जगवीर, गिरवर, हिम्मत, प्रकाश, निहाल सिंह, मोहनलाल, राजवीर, बच्चू, शिवचरण, बलवीर सिंह, ओमप्रकाश, सत्यवीर सिंह, श्याम बाबू, देवेंद्र सिंह, राममुरारी, बाबूचंद, लक्ष्मीनारायण, भगत सिंह, प्रेम सिंह, जयप्रकाश, युवा ब्लॉक अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह, आकाश और रासबिहारी सहित दर्जनों किसान एवं पदाधिकारी मौजूद रहे।
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