मऊ जिले के कलेक्ट्रेट परिसर में सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के सदस्यों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा। प्रदर्शनकारी सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने बताया कि भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (व्यय विभाग) के 3 नवंबर के संकल्प पत्र में केंद्रीय 8वें वेतन आयोग के गठन के विषय को लेकर देश भर के पेंशनरों में निराशा है। कर्मचारियों के अनुसार, पूर्व में गठित सभी केंद्रीय वेतन आयोगों के विषय बिंदुओं में पेंशनरों की पेंशन और अन्य लाभों का संदर्भ शामिल रहता था। हालांकि, मौजूदा आठवें वेतन आयोग के संकल्प पत्र में इस महत्वपूर्ण विषय को छोड़ दिया गया है। उन्होंने बताया कि वेतन आयोगों के इतिहास में यह पहली बार है कि वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने की तिथि से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पेंशन पुनरीक्षण को आयोग के दायरे से बाहर कर दिया गया है। सातवें वेतन आयोग के संकल्प पत्र दिनांक 28.02.2014 के पैरा (च) में स्पष्ट रूप से पेंशन के पुनरीक्षण और अन्य लाभों को वेतन आयोग के दायरे में लाया गया था। सातवें वेतन आयोग के प्रावधानों में उन सिद्धांतों की जांच शामिल थी जिनसे पेंशन और अन्य सेवानिवृत्तिक लाभों की संरचना शासित होनी चाहिए। इसमें उन कर्मचारियों की पेंशन का संशोधन भी शामिल था जो सिफारिशों के प्रभावी होने की तारीख से पहले सेवानिवृत्त हो चुके थे। इस प्रदर्शन के दौरान ओमप्रकाश सिंह, रमेशचंद्र गुप्ता, शीत कुमार सिंह, भजुराम सिंह, विजय प्रकाश पांडेय, राम कुंवर यादव और अखिलेश मल्ल सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।
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